एफआईआर को कारगर एवं पारदर्शी बनाया गया

ग्वालियर। माधव विधि महाविद्यालय द्वारा आज एडवोकेट लेक्चर सीरीज के अंतर्गत भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत सम सूचना रिपोर्ट के अंतर्गत क्या-क्या मुख्य परिवर्तन किए गए, इसके संबंध में व्याख्यान का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में अतुल शर्मा, शासकीय अधिवक्ता मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर द्वारा उद्बोधन दिया गया।

छात्र-छात्राओं को बताया गया कि भारतीय न्याय संहिता 2023 में जो नया वर्जन आया है, वह जेंडर फ्री है जिसके अंतर्गत आईटी एक्ट को समाहित करते हुए एफआईआर को और कारगर बनाया गया है। इस बात पर भी विशेष ध्यान दिया गया है कि फिर लिखते समय उसको त्वरित समय में डिटेल माध्यम से पोर्टल पर अपडेट किया जाएगा, उनके द्वारा एफआईआर की प्रति में जितने कॉलम होते हैं, उनका क्या महत्व है, इस पर भी बताया गया। यह भी बताया गया कि जीरो एफआईआर कब लिखी जाती है, एवं देहाती नालीसी में क्या मुख्य अंतर होता है, इसके साथ-साथ किस प्रकार से जीरो फिर किसी भी जगह करने के पश्चात घटना वाले क्षेत्र पर अंतरित की जाती है, उसके बारे में विशेष जानकारी दी। यह भी बताया कि एफआईआर संज्ञेय अपराध में ही लिखी जाती है और पुलिस को उस अपराध के संबंध में तथ्य इकट्ठे करने के लिए इसकी आवश्यकता होती है। आभार प्रदर्शन डॉ राजेंद्र सिंह धाकड़ द्वारा किया गया।

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