इंदौर: भागीरथपुरा प्रभावित क्षेत्र में डायरिया और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर की जा रही निगरानी में रविवार को बड़ी संख्या में मरीज सामने आए. रविवार को समाचार लिखे जाने तक 427 मरीजों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से 385 मरीजों का प्राथमिक उपचार कर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया है. वर्तमान में 42 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि 13 मरीजों की हालत गंभीर होने पर उन्हें आईसीयू में रखा है.
सीएमएचओ माधव हसानी ने बताया कि स्थिति पर काबू पाने के लिए 50 स्वास्थ्य दलों ने प्रभावित इलाकों में सर्वे किया. 176 सदस्यों की टीम ने 924 घरों में जाकर ओआरएस और जिंक का वितरण किया. सर्वे के दौरान 3,696 लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई गईं. महिलाओं और बच्चों की विशेष रूप से स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें ब्लड प्रेशर, शुगर और एनीमिया की जांच भी शामिल रही. भागीरथपुरा क्षेत्र में संचालित ओपीडी में रविवार को डायरिया के 13 मरीज सामने आए, जिनमें से एक मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए रेफर कर दिया.
सर्वे के विश्लेषण में यह सामने आया कि 94 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया कि उन्हें जिंक और ओआरएस उपलब्ध कराया गया है. डॉ. हासानी का कहना है कि प्रभावित क्षेत्र के रहवासियों को हेल्थ कार्ड वितरित किए हैं, जिनमें उनके स्वास्थ्य से जुड़े प्रमुख सूचकांकों की जानकारी दर्ज की गई है. आशा कार्यकर्ताओं द्वारा लोगों को घबराने की बजाय सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की समझाइश दी जा रही है. उन्होंने कहा कि जिलाधीश के निर्देश पर क्षेत्र में मरीजों के परिवहन के लिए तीन एम्बुलेंस तैनात की गई हैं और 24 घंटे चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई है.
पल-पल नजर रखी जा रही
गंभीर मरीजों को एमवाय अस्पताल, अरविंदो अस्पताल और बच्चों को चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में रैफर किया जा रहा है. निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को भी निःशुल्क उपचार, जांच और दवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार क्षेत्र में मौजूद हैं और हालात पर पल-पल नजर रखी जा रही है.
