
बकस्वाहा/छतरपुर। छतरपुर जिले के बकस्वाहा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले सुनवाहा उप स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्यकर्मियों की एक ऐसी लापरवाही सामने आई है, जो किसी की जान पर भारी पड़ सकती थी। यहाँ नियमित जांच के लिए पहुंची एक गर्भवती महिला को स्वास्थ्य केंद्र से फफूंद (Fungus) लगी और खुली हुई दवाएं थमा दी गईं। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दवा देखते ही उड़ गए होश
जानकारी के अनुसार, ग्राम सुनवाहा की निवासी 22 वर्षीय हेमा नामदेव, जो 5 महीने की गर्भवती हैं, जांच के लिए उप स्वास्थ्य केंद्र गई थीं। वहाँ तैनात स्वास्थ्यकर्मियों ने उन्हें कैल्शियम की टेबलेट्स दीं। जब हेमा ने घर जाकर दवा देखी, तो टेबलेट्स पहले से खुली हुई थीं और उन पर सफेद धब्बे (फफूंद) लगे हुए थे। खराब दवा की जानकारी मिलते ही परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
अव्यवस्थाओं का केंद्र बना अस्पताल
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि गर्भवती महिला को ऐसी दवा देना उसकी और उसके होने वाले बच्चे की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि इस केंद्र में न केवल दवाओं के रख-रखाव में लापरवाही बरती जा रही है, बल्कि यहाँ लंबे समय से गंदगी का अंबार लगा हुआ है। अस्पताल के कमरों और परिसर में सफाई न होने से मरीजों को संक्रमण का खतरा बना रहता है।
बीएमओ का सख्त रुख
मामला तूल पकड़ते ही ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ. सत्यम आसाटी ने घटना का संज्ञान लिया है। उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही करार देते हुए कहा, “गर्भवती महिला को खराब दवा देना अक्षम्य है। मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
