सतना:शहर के एक मात्र पूर्ण विकसित चौराहे सेमरिया चौक इन दिनों फुटपाथ व्यापारियों के चलते जबरदस्त अतिक्रमण के चपेट में है. हालत यह है कि शाम के समय इस रास्ते से दोपहिया वाहन भी निकल पाना मुश्किल होता है.उल्लेखनीय है कि सेमरिया चौराहे में फ्लाईओवर बनने के पहले शहर के सुंदर चौराहो में प्रमुख था .पूर्व महापौर पुष्कर सिंह तोमर ने अपने कार्यकाल के दौरान इस चौराहे का सौंदर्यीकरण कर न सिर्फ लाखो रुपए खर्च किए थे बल्कि उसे विशेष वाटिका से सजाया भी था.पूरी तरह से अतिक्रमण की चपेट में आ चुके इस चौराहे को इसका पुराना स्वरूप देने के उद्देश्य से वर्तमान महापौर योगेश ताम्रकार ने रिक्त पड़ी भूमि पर चौपाटी स्थापित कर दी थी.उनके इस प्रयास में रेडी पटरी वाले दुकानदारों को व्यवस्थित रूप से मुख्य मार्ग से हटाकर सड़क को अतिक्रमण मुक्त करना भी था.
वर्तमान में इसके हालात पहले से भी बदतर हो गए हैं. चौपाटी के अंदर और सड़क के दोनों ओर लोगो ने अवैध कब्जा कर रखा है.सेमरिया चौक न केवल शहर को जोड़ता है. बस स्टैंड होने के कारण हजारो की संख्या में लोगो का आवागमन होता रहता है. फिलहाल चौक के चारों ओर बस,ऑटो चालकों ने सड़कों को ही अपना स्टैंड बना लिया है। सवारी बैठाने की होड़ में ऑटो चालक बीच सड़क पर वाहन रोक देते हैं, जिससे पीछे चल रहे वाहनों की गति थम जाती है। पुलिस की उपस्थिति के बावजूद इन चालकों में नियमों का खौफ नजर नहीं आता।
वही चौक के आसपास के दुकानदारों ने अपनी सीमाएं सड़कों तक बढ़ा ली हैं। फुटपाथ पर सामान सजा होने के कारण पैदल यात्रियों के पास मुख्य मार्ग पर चलने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। पार्किंग के अभाव में ग्राहक भी अपनी गाड़ियाँ सड़क पर ही पार्क करते हैं, जिससे चौड़ी सड़कें संकरी गली में तब्दील हो गई हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यातायात पुलिस का ध्यान केवल खानापूर्ति और चालान काटने पर रहता है। प्रशासन की तरफ़ से जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक सेमरिया चौक की स्थिति सुधरना मुश्किल है।
सतना का सेमरिया चौक आज अव्यवस्था का पर्याय बन चुका है। नगर निगम और अधिकारियों की लापरवाही से शहर के सबसे प्रमुख सेमरिया चौक अतिक्रमण के चपेट में आ गया है , नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी वातानुकूलित कमरों में बैठकर शहर को स्मार्ट बनाने के दावे कर रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि उनके ही नाक के नीचे सेमरिया चौक को अतिक्रमणकारियों ने लील लिया है। व्यापारिक संगठनों और बुद्धिजीवियों का स्पष्ट आरोप है कि निगम की उदासीनता और इच्छाशक्ति की कमी के कारण ही आज यह गौरवशाली चौराहा अपनी पहचान खो चुका है।
