वाणिज्यिक बैंकों के ऋण करोबार में 15.9 की मजबूत वृद्धि

नयी दिल्ली , 05 मई (वार्ता) देश में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) की ओर से विभिन्न क्षेत्रों को दिये जाने वाले ऋण कारोबार में वित्त वर्ष 2025-26 में 15.9 प्रतिशत की मजबूत ऋण वृद्धि दर्ज की गयी जो मजबूत आर्थिक गतिविधि और ऋण मांग को दर्शाती है। वित्त मंत्रालय की मंगलवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में ऋण वृद्धि वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 15.7 प्रतिशत रही, जो इससे पिछले वर्ष के 10.4 प्रतिशत से अधिक है। यह मजबूत ग्रामीण मांग और बेहतर ऋण प्रवाह को दर्शाता है।औद्योगिक क्षेत्र में ऋण वृद्धि बढ़कर 15 प्रतिशत हो गई, जो पिछले वर्ष 8.2 प्रतिशत थी। विज्ञप्ति के अनुसार इसमें सूक्ष्म , लघु एवं मझोले उद्यम क्षेत्र को दिये जाने वाले कर्ज में मजबूत वृद्धि का बड़ा योगदान है।

वर्ष के दौरान सेवा क्षेत्र में ऋण वृद्धि 19 प्रतिशत रही, जो इससे पिछले वर्ष 12 प्रतिशत थी। इसमें गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी), व्यापार और वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। सेवा क्षेत्र का कुल ऋण कारोबार में योगदान 28 प्रतिशत है। कुल ऋण में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले व्यक्तिगत ऋण खंड में वार्षिक वृद्धि 16.2 प्रतिशत रही, जिसमें एक वर्ष पहले 11.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी। इसमें वाहन ऋण और सोने के बदले ऋण की मजबूत मांग तथा आवास ऋण में स्थिर वृद्धि शामिल है।

औद्योगिक क्षेत्र में सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिए वर्ष के दौरान कर्ज में वृद्धि की दर 33.1 प्रतिशत रही जो एक साल पहले की वृद्धि के 3.7 गुना से अधिक है। मझोले उद्योगों के लिए ऋण में वार्षिक आधार पर वृद्धि 21.7 प्रतिशत देखी गई। अवसंरचना, मूल धातुओं, रसायनों, पेट्रोलियम, कोयला उत्पाद और परमाणु ईंधन क्षेत्र के लिए कर्ज में अच्छी वृद्धि दिखी है। वैश्विक स्तर पर भू-आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है और यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बनी हुई है। भारतीय बैंकिंग क्षेत्र, जो आर्थिक विकास का मुख्य इंजन है, वर्तमान में मजबूत स्थिति में है। बैंकिग क्षेत्र बेहतर पूंजीकरण, अवरुद्ध ऋण (एनपीए) के निम्न स्तर और निरंतर लाभप्रदता के साथ अर्थव्यवस्था की वृद्धि क्षमता को और मजबूत कर रहा है।

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