प्रदेश की राजनीति में नहीं मिला अवसर

विंध्य की डायरी

डॉ रवि तिवारी:विंध्य में भारतीय जनता पार्टी ने सामाजिक सन्तुलन बनाने की दृष्टि से लगभग सभी पदों पर नियुक्ति की घोषणा कर दी है. पर यह संयोग ही रहा कि विंध्य के किसी नेता को निगम मंडल में स्थान नहीं मिल पाया. बुंदेलखंड के पन्ना से संजय नगाइच को वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. शेष पर मालवा, निमाड़ और मध्य भारत का दबदबा कायम रहा.महाकौशल को भी उतना महत्व नहीं मिला जितना मिल सकता था. विंध्य विकास प्राधिकरण से लेकर चित्रकूट विशेष विकास प्राधिकरण तक सभी पदों पर पार्टी की निष्ठा से सेवा करने वालो को मौका दिया गया है.

यही वजह है कि कोई नेता व कार्यकर्ता इन नियुक्ति का विरोध नहीं कर रहा. इन नियुक्तियों से यह भी संकेत मिल रहे हैं कि राज्य मंत्रिमंडल में अगर विस्तार हुआ तो विंध्य से कुछ नेताओं को स्थान मिल सकता है. ताकि सरकार में विंध्य की भागीदारी बढ़ सके. अभी नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति की सूची आनी शेष है. जिसमें पार्टी सक्रिय कार्यकर्ताओ को पार्टी स्थान देने पर विचार कर सकती है.भाजपा ने 2028 के लिए होने वाली जमावट का फिलहाल इन नियुक्तियों के साथ शुभारंभ कर दिया है. पद पाने की चाहत के साथ कई नेता दौड में थे लेकिन उनको मौका नही मिला. संगठन ने आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए नियुक्त की. अब देखना है कि इसका लाभ आगे पार्टी को कितना मिलता है और नव नियुक्त अध्यक्ष संगठन की कसौटी पर कितना खरा उतरते हैं , यह तो आने वाला समय बतायेगा.

अंतर्कलह से जूझ रही आप पार्टी

विंध्य क्षेत्र में आम आदमी पार्टी ने शुरूआती दौर में तेजी से उभरने के साथ संगठन को खड़ा करने का काम शुरू किया. लेकिन अंतर्कलह के चलते पार्टी कमजोर होती चली गई. आपसी खीचतान के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं जो पार्टी के स्थानीय संगठन की कमजोरी को उजागर करते हैं . शुरूआती दौर से ही आप के स्थानीय नेताओं के बीच वर्चस्व की जंग और आपसी मतभेद सामने आने लगे थे. यही वजह है कि संगठन खड़ा नही हो पाया और कार्यकर्ताओ में निराशा छाती गई. पार्टी के आलाकमान द्वारा किये गये बदलावों का भी असर विंध्य के स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूत करने में नहीं दिख रहा है.

आपसी असंतोष पूरे विंध्य में खुलकर सामने आ चुका है. गुटबाजी और समन्वय की कमी के कारण जमीनी स्तर के कार्यकर्ता खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं. धीरे-धीरे पार्टी कमजोर होती चली जा रही है. सिंगरौली में चल रहा विवाद भी थमने का नाम नही ले रहा है. रीवा में भी कई नेता पद से इस्तीफा देकर जिम्मेदारी से हट गये. जमीनी स्तर पर कहीं भी संगठन दिखाई नहीं दे रहा है. उम्मीद थी कि तीसरे विकल्प के रूप में आप पार्टी उभरेगी पर ऐसा दिख नहीं रहा है.

विंध्य में कही भी उतर सकता है उड़न खटोला

समूचे विंध्य क्षेत्र में समर्थन मूल्य पर गेंहू की खरीदी चल रही है जहां किसान अपनी उपज बेच रहे है. किसानों को कोई असुविधा न हो और खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे इसके निर्देश प्रदेश के मुखिया डा. मोहन यादव ने अधिकारियों को दिये हैं और खुद औचक निरीक्षण कर फीडबैक ले रहे है. विंध्य में कही भी मुख्यमंत्री का उडऩ खटोला उतर सकता है । किसी भी खरीदी केन्द्र का औचक निरीक्षण करने पहुंच सकते है. इसको लेकर खरीदी केन्द्रो में व्यवस्था कुछ हद तक ठीक है. डऱ है कि कही भी प्रदेश के मुखिया पहुंच सकते है.

गड़बड़ी मिलने पर गाज भी गिर सकती है. मुख्यमंत्री के औचक निरीक्षण को लेकर विंध्य के खरीदी केन्द्रो में अघोषित तैयारी है. किसान भी उम्मीद लगाकर बेठे हैं , अगर प्रदेश के मुखिया उनके खरीदी केन्द्र में पहुंचते है तो अपनी समस्याएं भी रख सकेंगे. सीएम की यह एक अच्छी पहल है कि वह खुद अपनी आंखो से मैदानी हकीकत देखेगे. अधिकारियों को डऱ सता रहा है कि कब किस क्षेत्र में सीएम पहुंच जाए ! फिलहाल खरीदी केन्द्रो में अधिकारियों की नजर बनी हुई है.

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