इंदौर: गर्मी बढ़ते ही एक बार फिर पानी की समस्या सामने आने लगी है. इंदौर शहर में नर्मदा परियोजना के तीसरे चरण के बाद भी कई इलाकों में लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है. हर साल की तरह इस बार भी जल संकट का असर साफ दिखाई देने लगा है.ऐसे समय में नगर निगम के हाइड्रेंट से कुछ ऐसे टैंकर पानी भरते हुए देखे गए हैं, जिन पर न तो ‘नगर निगम लिखा’ है और न ही जोन या वार्ड क्रमांक अंकित है. इससे यह पहचान करना मुश्किल हो रहा है कि कौन सा टैंकर सरकारी है और कौन प्राइवेट. बबलू शर्मा ने स्पष्ट किया कि यदि कोई प्राइवेट टैंकर नगर निगम के हाइड्रेंट से अवैध रूप से पानी भरता पाया गया, तो संबंधित अधिकारी और टैंकर संचालक दोनों पर कार्रवाई की जाएगी. टैंकर जप्त किया जाएगा.
निगम ने दी सफाई, बताई नई व्यवस्था
इस मुद्दे पर एमआईसी सदस्य बबलू शर्मा ने बताया कि कुछ टैंकरों को तुरंत सेवा में लगाने के कारण उन पर पहचान चिन्ह नहीं डाली जा सकी. उन्होंने कहा कि अब सभी निगम टैंकरों पर जल्द ही पीला रंग किया जाएगा और उन पर स्पष्ट रूप से नंबर व पोस्टर लगाए जाएंगे. इन पोस्टरों पर शिकायत के लिए संपर्क नंबर भी लिखा होगा और निःशुल्क जल वितरण का उल्लेख रहेगा, ताकि जनता आसानी से सरकारी टैंकरों की पहचान कर सके.
पानी की कमी और टैंकरों पर बढ़ती निर्भरता
गर्मी के मौसम में पानी की मांग बढ़ने के कारण शहर के कई क्षेत्रों में टैंकरों से पानी सप्लाई की जा रही है. एक तरफ प्राइवेट टैंकर संचालक अपने हिसाब से पानी बेच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नगर निगम ने जनता को राहत देने के लिए निशुल्क टैंकर सेवा शुरू की है.
शिकायत की सुविधा
अगर कोई टैंकर चालक पानी देने के बदले पैसे मांगता है, तो नागरिक टैंकर पर दिए गए नंबर पर शिकायत कर सकते हैं. इसके अलावा 311 ऐप के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.
पानी की कमी के कारण
नगर निगम के अनुसार, नर्मदा से आने वाला पानी तय मात्रा में ही मिल रहा है. वहीं दूसरी ओर, गर्मी के कारण भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है. जिन बड़े घरों और टाऊनशिप कवर्ड कॉलोनियों में बोरिंग है, वहां भी पानी का स्तर कम हो गया है, जिससे टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है. स्थिति को देखते हुए नगर निगम ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर प्राइवेट बोरवेल को अधिग्रहित कर वहां से भी आम जनता को पानी उपलब्ध कराया जाएगा. इंदौर में पानी की समस्या हर साल की तरह इस बार भी गंभीर होती जा रही है. हालांकि नगर निगम राहत देने के प्रयास कर रहा है, लेकिन बढ़ती मांग और घटते जलस्तर के चलते स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है
