नई दिल्ली,31 दिसंबर, 2025: पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) के करोड़ों निवेशकों के लिए आज का दिन निर्णायक साबित होने वाला है। केंद्र सरकार आज जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही के लिए नई ब्याज दरों की घोषणा करेगी। पिछले पांच वर्षों से पीपीएफ की दरें 7.1% पर स्थिर हैं, लेकिन इस बार कटौती की प्रबल आशंका जताई जा रही है। इसका मुख्य कारण सरकारी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट है, जो वर्तमान में औसत 6.54% के करीब बनी हुई है। नियमों के अनुसार, यदि इसमें निर्धारित मार्जिन जोड़ा जाए तो ब्याज दर 6.79% के आसपास बैठती है, जो मौजूदा दर से काफी कम है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि नवंबर 2025 में खुदरा महंगाई दर का 0.71% के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचना भी ब्याज दरों में कटौती का एक बड़ा आधार बन सकता है। जब महंगाई दर कम होती है, तो निवेशकों को मिलने वाला ‘रियल रिटर्न’ स्वतः बढ़ जाता है, जिससे सरकार पर दरों को तर्कसंगत बनाने का दबाव बढ़ता है। हालांकि, पीपीएफ केवल एक निवेश नहीं बल्कि करोड़ों परिवारों की सामाजिक सुरक्षा और रिटायरमेंट का आधार है। इसी संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने लंबे समय से दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।
वित्त मंत्रालय के शाम को आने वाले आदेश पर सबकी नजरें टिकी हैं। यदि ब्याज दरों में मामूली कटौती होती भी है, तो विशेषज्ञों का मानना है कि पीपीएफ अब भी बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की तुलना में एक मजबूत विकल्प बना रहेगा। इसका सबसे बड़ा आकर्षण इसमें मिलने वाली ‘टैक्स-फ्री मैच्योरिटी’ और इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत मिलने वाली छूट है। सुरक्षित निवेश और सरकारी गारंटी के कारण, मध्यम वर्ग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह आज भी सबसे भरोसेमंद बचत का साधन बना हुआ है।

