दिल्ली से मुंबई तक संघर्ष, फिर सफलता की मिसाल बने केके, 53 साल की उम्र में छोड़ गए संगीत की विरासत

मशहूर गायक केके आज भी अपनी आवाज के जरिए करोड़ों दिलों में जिंदा है। पल, तड़प तड़प और आंखों में तेरी जैसे गानों ने उन्हें भारतीय संगीत जगत के सबसे यादगार गायकों में शामिल कर दिया।

‘हम रहें या न रहें कल, कल याद आएंगे ये पल…एक ऐसा गाना जिसने आज तक करोड़ों लोगों के दिलों पर राज किया है। केके का ये गाना सिर्फ एक लाइन नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की एहसासों का एक हिस्सा है। जब भी यह गाना कहीं बजता है, तो लोगों के दिलों को छू जाता है। केके की आवाज में न दिखावा था, न शोर, लेकिन एक ऐसा जादू था जो सीधे दिल में उतर जाता था। 31 मई 2022 को जब केके ने इस दुनिया को अलविदा कहा, तब फैंस को उनकी ही गाई ये लाइनें याद आईं।

केके का असली नाम कृष्णकुमार कुन्नथ था। केके का जन्म 23 अगस्त 1968 को दिल्ली के एक मलयाली परिवार में हुआ था। पिता सीएस नायर और मां कनकवल्ली केके के जीवन की पहली प्रेरणा थे। दिल्ली में पले-बढ़े केके बचपन में डॉक्टर बनना चाहते थे, लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था।

जब पहली बार चला केके की आवाज का जादू
माउंट सेंट मैरी स्कूल में पढ़ाई के समय ही उनकी गायकी की झलक दिखने लगी थी। दूसरी क्लास में केके ने पहली बार मंच पर अपना परफॉर्मेंस दिया था। किशोर कुमार और आरडी बर्मन उनके आदर्श थे। शायद यही वजह थी कि उनकी आवाज में पुरानी मिठास और नए दौर की ताजगी दोनों महसूस होती थी।

दिल्ली यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में ग्रेजुएट होने के बाद केके ने कुछ समय होटल इंडस्ट्री में मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव की नौकरी भी की। लेकिन उनकी जान संगीत में ही बसती थी। साल 1994 में वे मुंबई पहुंचे और उनके जीवन का असली संघर्ष शुरू हुआ।

‘छोड़ आए हम वो गलियां’…से हुई बड़े पर्दे की शुरुआत
मुंबई आने के बाद केके को फिल्मों से पहले विज्ञापनों में गाने का मौका मिला। देखते ही देखते उन्होंने 3,500 से ज्यादा जिंगल्स रिकॉर्ड किए। ये उनके जीवन की अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी। कई बड़े ब्रांड्स के विज्ञापनों में भी उनकी आवाज सुनाई देने लगी। वहीं इसी दौरान संगीतकार लेस्ली लुईस उनके मार्गदर्शक बने और उन्होंने केके की प्रतिभा को पहचानने में बड़ी भूमिका निभाई।

बॉलीवुड की दुनिया में केके को पहला बड़ा मौका संगीतकार और निर्देशक विशाल भारद्वाज ने दिया। फिल्म ‘माचिस’ के गीत ‘छोड़ आए हम’ से उनकी शुरुआत हुई, लेकिन असली पहचान मिली 1999 में आई फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ के गीत ‘तड़प तड़प के’ से। इस गीत में दर्द, प्रेम और बिछड़ने की जो भावना थी, उसे केके ने अपनी आवाज से अमर बना दिया। गाना सुपरहिट हुआ और रातोंरात केके बॉलीवुड के मशहूर गायकों में शामिल हो गए।

एल्बम ‘यारों’ से छाया केके की आवाज का जादू
वहीं साल 1999 में सोनी म्यूजिक ने केके का पहला सोलो एल्बम ‘पल’ रिलीज किया। इस एल्बम के दो गाने ‘पल’ और ‘यारों’ आज भी हर फेयरवेल और दोस्तों की महफिल का हिस्सा हैं। और लोगों के दिलों की जान बन चुके हैं।

केके उन चुनिंदा गायकों में थे जिनकी आवाज हर तरह के गीतों में फिट बैठती थी। रोमांस हो, दर्द हो, दोस्ती हो या जिंदगी का उत्साह, हर भावना को उन्होंने बखूबी आवाज दी। ‘आंखों में तेरी’, ‘खुदा जाने’, ‘जरा सा’, ‘अलविदा’, ‘तू ही मेरी शब है’, ‘बीते लम्हें’, ‘दिल इबादत’, ‘दस बहाने’ जैसे न जाने कितने गाने आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में शामिल हैं।

केके सिर्फ हिंदी ही नहीं, बल्कि तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, मराठी और बंगाली भाषाओं में भी अपनी आवाज का जादू बिखेर चुके हैं। केके ने अपने गायिकी के करियर में 700 से अधिक गाने गाए थे।

31 मई साल 2022 को केके का दुनिया को अलविदा
गायक केके के जीवन का वो आखिरी मंच जब 31 मई 2022 को कोलकाता के नजरुल मंच में एक लाइव कॉन्सर्ट के दौरान केके ने परफॉर्मेंस दी। शो खत्म होने के कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। महज 53 साल की उम्र में संगीत की दुनिया के जादूगर की वो आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई और फैंस की जुबां पर बस एक लाइन बनकर रह गई ‘छोड़ आए हम, वो गलियां…।’

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