अमेरिका और ईरान के बीच कोई युद्ध नहीं चल रहा – ट्रंप

वॉशिंगटन, 01 मई (वार्ता) ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को स्पष्ट किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई युद्ध नहीं चल रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या सैन्य अभियानों के लिए तय 60 दिनों की कानूनी समय सीमा खत्म हो गई है। इस विवाद ने अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में नए कानूनी और संवैधानिक सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के अध्यक्ष माइक जॉनसन ने तर्क दिया कि फिलहाल इस सैन्य अभियान के लिए संसद से अलग से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अभी कोई सक्रिय लड़ाई नहीं हो रही है। उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में कहा, “मुझे नहीं लगता कि अभी कहीं बमबारी या गोलीबारी जैसी कोई सक्रिय सैन्य गतिविधि चल रही है। फिलहाल हम शांति समझौता कराने की कोशिश कर रहे हैं, हम युद्ध में नहीं हैं।”

दरअसल, अमेरिका में 1973 का ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ लागू है। यह कानून राष्ट्रपति को पाबंद करता है कि अगर वह कहीं सैन्य कार्रवाई शुरू करते हैं, तो उन्हें 60 दिनों के भीतर सेना वापस बुलानी होगी, जब तक कि संसद उस कार्रवाई को आगे बढ़ाने की विशेष अनुमति न दे दे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो मार्च को इस अभियान के बारे में संसद को जानकारी दी थी, जिसके हिसाब से एक मई को 60 दिन पूरे हो रहे हैं। हालांकि, सांसदों के बीच इस बात को लेकर मतभेद हैं कि समय सीमा खत्म हुई है या नहीं। विवाद का मुख्य कारण यह है कि क्या युद्ध के बीच में आए अस्थायी ठहराव या शांति के समय को भी इन 60 दिनों में गिना जाना चाहिए। व्हाइट हाउस का कहना है कि बीच में हुए संघर्ष विराम (सीजफायर) की वजह से यह समय सीमा प्रभावी रूप से रुक गई थी। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सीनेट में सुनवाई के दौरान कहा कि युद्धविराम के दौरान 60 दिनों की इस अवधि को ‘रोका’ जा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस कानून की अंतिम व्याख्या व्हाइट हाउस के कानूनी सलाहकार ही करेंगे।

दूसरी ओर, विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य इस दलील को सिरे से खारिज कर रहे हैं। सांसद टिम केन ने चेतावनी दी कि कानून में इस तरह के किसी ‘पॉज’ या ठहराव का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर बिना अनुमति के समय सीमा बीत गई है, तो ट्रंप प्रशासन कानून का उल्लंघन कर रहा है।
खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस सैन्य कार्रवाई के लिए अलग-अलग शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कभी इसे ‘युद्ध’ कहा, कभी ‘सैन्य अभियान’ तो कभी इसे ‘छोटी सैर’ (लिटिल एक्सकर्शन) बताया। एक मौके पर उन्होंने यह भी कहा कि ‘मुझे युद्ध में जाना पड़ा’, लेकिन साथ ही वे यह भी जानते हैं कि ‘युद्ध’ शब्द का इस्तेमाल करने पर उन्हें संसद से मंजूरी लेने की कानूनी जरूरत पड़ेगी।

इस पूरे विवाद की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान और उसके आसपास के ठिकानों पर मिलकर हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को निशाना बनाया और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही रोक दी, जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। विपक्षी सांसदों ने इस संघर्ष से होने वाले भारी जान-माल के नुकसान और खर्च को लेकर सरकार की आलोचना की है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि संसद में इस अभियान को रोकने की कोशिशें सफल होना मुश्किल है, क्योंकि वहां रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण है और राष्ट्रपति के पास वीटो पावर भी है।

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