मुंबई, (वार्ता) आध्यात्मिक विचारक धीरेंद्र शास्त्री द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज पर की गई टिप्पणी को लेकर विवाद उनके सार्वजनिक माफी मांगने के बावजूद बढ़ता जा रहा है और महाराष्ट्र भर में विरोध प्रदर्शन थमने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं।
मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम मंदिर के प्रमुख शास्त्री ने कहा है कि आध्यात्मिक प्रवचन के दौरान की गई उनकी टिप्पणियां ऐतिहासिक संदर्भ से परे थीं, लेकिन फिर भी अगर उनके बयानों से महाराष्ट्र के विभिन्न लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है तो वे इसके लिए माफी मांगते हैं।
सोमवार को एनसीपी नेता रोहित पवार ने शास्त्री के राज्य में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की अपनी मांग दोहराई।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक श्री पवार ने सोमवार को सत्ताधारी दल की आलोचना करते हुए कहा कि सत्ता में मौजूद एक प्रमुख दल को छोड़कर पूरे राज्य ने शास्त्री की टिप्पणियों की निंदा की है।
उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार के कुछ वर्ग धार्मिक व्यक्ति का समर्थन क्यों कर रहे हैं और पूछा कि क्या शास्त्री को महाराष्ट्र की पहचान के प्रतीक ऐतिहासिक व्यक्तित्व से ऊपर रखा जा रहा है।
इस बीच, महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने जोर देकर कहा कि शिवाजी महाराज का कोई भी अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी तर्क दिया कि शास्त्री द्वारा पहले ही माफी मांग लिए जाने के कारण लगातार विरोध प्रदर्शन करना अनुचित है।
अपने हमले को तेज करते हुए श्री पवार ने आरोप लगाया कि ऐसी चर्चाएं चल रही हैं कि बागेश्वर धाम के नेता के कार्यक्रमों को सत्ताधारी पार्टी द्वारा प्रायोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र संतों और पूजनीय हस्तियों की भूमि है, और ऐसे व्यक्तित्वों को बाहर से आमंत्रित करने की आवश्यकता पर सवाल उठाया। उन्होंने आगे कहा कि विवादों के बीच नागपुर में शास्त्री का कार्यक्रम अभी भी जारी रहना “शर्मनाक” है।
श्री पवार ने नागपुर कार्यक्रम को रोकने के लिए तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की मांग की और महाराष्ट्र में शास्त्री पर स्थायी प्रतिबंध लगाने की अपनी मांग को दोहराते हुए कहा कि राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की गरिमा को बनाए रखने के लिए ऐसे कदम आवश्यक हैं।
