भारत और न्यूजीलैंड के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हुए हस्ताक्षर, 70 प्रतिशत भारतीय उत्पादों को मिला टैक्स-फ्री एक्सेस, एमएसएमई और कारीगरों की चमकेगी किस्मत

नई दिल्ली | भारत और न्यूजीलैंड के द्विपक्षीय संबंधों में आज एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने ‘पीढ़ी में एक बार’ होने वाला क्रांतिकारी कदम बताया है। इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड के निर्यातकों को 1.4 अरब की आबादी वाले विशाल भारतीय बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी। प्रधानमंत्री लक्सन ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि दशकों से जो समझौता असंभव माना जा रहा था, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब हकीकत बन चुका है। यह डील दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को नई ऊंचाई पर ले जाने का काम करेगी।

भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते की महत्वपूर्ण बारीकियों को साझा करते हुए बताया कि इसके लागू होने से भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले लगभग 70 प्रतिशत उत्पादों पर अब कोई सीमा शुल्क (Customs Duty) नहीं लगेगा। यह कदम विशेष रूप से भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) और पारंपरिक कारीगरों के लिए संजीवनी साबित होगा। गोयल ने रेखांकित किया कि आगरा का चमड़ा उद्योग और उत्तर प्रदेश का हथकरघा क्षेत्र इस समझौते से सीधे लाभान्वित होंगे। ‘एक जिला, एक उत्पाद’ (ODOP) के तहत आने वाले हस्तशिल्प उत्पादों को अब वैश्विक पहचान मिलेगी, जिससे स्थानीय बुनकरों की आय में भारी वृद्धि की उम्मीद है।

व्यापार के साथ-साथ यह समझौता रणनीतिक साझेदारी और कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगा। न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले ने भारत को अपनी ‘रणनीतिक प्राथमिकता’ बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच जल्द ही सीधी उड़ानें शुरू होने की संभावना है। इससे न केवल व्यापारिक यात्राएं सुगम होंगी, बल्कि पर्यटन क्षेत्र को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एफटीए कृषि, डेयरी और तकनीक जैसे क्षेत्रों में निवेश के नए द्वार खोलेगा। भारत के लिए यह समझौता अपनी अर्थव्यवस्था को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी शक्ति बनाने की दिशा में एक बड़ा रणनीतिक कदम है, जो भविष्य में व्यापार घाटे को कम करने में भी सहायक होगा।

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