
चितरंगी । चितरंगी ब्लॉक के ग्राम फुलकेश में राजगुरु परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत वातावरण बना रहा।
कथा व्यास परम पूज्य अरुण कृष्ण शास्त्री ने अपने प्रवचन में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को जीवन का गूढ़ संदेश दिया। हाराज जी ने कहा कि भगवान के 16,108 विवाहों में आठ प्रकृति के स्वरूप हैं, जबकि शेष वेदों के मंत्र स्वरूप हैं, जो साधना से प्राप्त होते हैं। राजा नृग की कथा सुनाते हुए उन्होंने बताया कि अपमान और विवाद व्यक्ति के पतन का कारण बनते हैं, इसलिए प्रेम और सद्भाव से जीवन जीना ही सच्चा मार्ग है। सुदामा चरित्र के माध्यम से महाराज जी ने समझाया कि सच्ची मित्रता में अमीरी-गरीबी का कोई स्थान नहीं होता। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता समाज को समानता और भाईचारे का संदेश देती है। उन्होंने शिक्षा में समान अवसर की आवश्यकता पर भी बल दिया, जिससे समाज में ऊंच-नीच की खाई समाप्त हो सके। कथा के दौरान परीक्षित मोक्ष प्रसंग का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया। वहीं कृष्ण-सुदामा की मनोहारी झांकी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर मुख्य रूप से रीति पाठक की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में कुलगुरु विष्णु द्विवेदी, यज्ञ आचार्य लड्डू कृष्ण शास्त्री, विजय मिश्रा, सूरज मिश्रा, संतोष, रवि, दिनेश, यजमान सुखेंद्र धर द्विवेदी, शीतलाधर द्विवेदी, सचिन, राहुल, सिंपल, संदीप, पप्पू, रावेंद्र धर, प्रवेंद्र धर, वैभवधर, अनिमेष धर, शिवांशु धर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कथा के उपरांत विधि-विधान से हवन एवं महाराज जी की विदाई सम्पन्न हुई। पूरे आयोजन में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का माहौल बना रहा तथा समाज को प्रेम, शांति और सद्भाव के साथ जीवन जीने का संदेश मिला।
