दिल्ली पुलिस की साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, शेल कंपनी नेटवर्क का भंडाफोड़

नयी दिल्ली, 25 अप्रैल (वार्ता) दिल्ली पुलिस के बाहरी उत्तरी जिले की साइबर पुलिस ने म्यूल बैंक खातों और शेल कंपनियों के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस नेटवर्क का इस्तेमाल भारत और विदेशों में धोखाधड़ी के पैसे को ठिकाने लगाने और धन शोधन के लिए किया जाता था।

आरोपी नेटवर्क ने कथित तौर पर ‘मैसर्स मेसिट ट्रेडेक्स प्राइवेट लिमिटेड’ से जुड़े एक ही बैंक खाते के माध्यम से महज आठ दिनों के भीतर 16 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन किया। इस फर्म के डमी निदेशक के रूप में काम कर रहे सोनू कुमार और अमिंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है।

नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के माध्यम से सामने आये इस मामले ने वित्तीय धोखाधड़ी के गहरे और बहुस्तरीय तंत्र (इकोसिस्टम) का पर्दाफाश किया है, जिसमें कई शेल कंपनियां शामिल हैं और विभिन्न राज्यों से साइबर धोखाधड़ी की सैकड़ों शिकायतें जुड़ी हुई हैं।

बाहरी उत्तरी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) हरेश्वर स्वामी ने कहा, “जो लोग साइबर अपराधियों को म्यूल अकाउंट, शेल कंपनियां या वित्तीय माध्यम उपलब्ध कराते हैं, वे केवल सुविधा प्रदाता नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक अपराध के सक्रिय सहयोगी हैं। ऐसी गतिविधियां वित्तीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं और इनसे सख्ती से निपटा जायेगा। ‘मिशन म्यूल हंटिंग’ के तहत बाहरी उत्तरी जिला पुलिस इस नेटवर्क की हर परत को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

पुलिस के अनुसार, एनसीआरपी और आईसीसीसीसी के ‘समन्वय पोर्टल’ से मिले इनपुट के बाद बाहरी उत्तरी जिले के साइबर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। विश्लेषण के दौरान बवाना स्थित एक राष्ट्रीय बैंक की शाखा में मैसर्स मेसिट ट्रेडेक्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा एक बैंक खाता संदिग्ध और भारी-भरकम लेन-देन के कारण जांच के दायरे में आया।

जांच में खुलासा हुआ कि यह खाता विभिन्न राज्यों में साइबर धोखाधड़ी की कम से कम 336 शिकायतों से जुड़ा था। चौंकाने वाली बात यह है कि महज आठ दिनों के भीतर इस खाते से 16 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन किया गया, जो स्पष्ट रूप से बड़े पैमाने पर धन शोधन की गतिविधि की ओर इशारा करता है। यह खाता पैसे के लेन-देन की कई परतों में सक्रिय पाया गया और इसमें ऐसी वित्तीय गतिविधियां देखी गयी, जो कंपनी की घोषित व्यावसायिक प्रोफाइल से मेल नहीं खाती थीं।

आगे की जांच में 35 से अधिक संदिग्ध शेल कंपनियों के साथ संबंध उजागर हुए, जिससे एक विशाल और बहुस्तरीय धन शोधन नेटवर्क का पता चला है, जो विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से सैकड़ों करोड़ रुपये का लेन-देन कर रहा था। दिल्ली के पीतमपुरा, रानी बाग और नेताजी सुभाष प्लेस जैसे क्षेत्रों को ऐसी शेल संस्थाओं के प्रमुख परिचालन केंद्रों के रूप में पहचाना गया है।

वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में इंस्पेक्टर गोविंद सिंह के नेतृत्व वाली पुलिस टीम ने आरोपियों का पता लगाने के लिए विस्तृत वित्तीय विश्लेषण और तकनीकी निगरानी की। एकत्र किये गये सबूतों में बैंक लेन-देन के रिकॉर्ड, डिजिटल वित्तीय सुराग, केवाईसी दस्तावेज और तकनीकी संकेत शामिल हैं, जो खातों के रिमोट ऑपरेशन की ओर इशारा करते हैं।

पूछताछ के दौरान पता चला कि जरूरतमंद व्यक्तियों को नौकरी या कमीशन का लालच देकर शेल कंपनियां और बैंक खाते खोलने के लिए ‘डमी डायरेक्टर’ के रूप में इस्तेमाल किया गया था। हालांकि उनके केवाईसी विवरणों का उपयोग किया गया था, लेकिन मोबाइल नंबरों, ईमेल आईडी और बैंकिंग एक्सेस का वास्तविक नियंत्रण उनके हैंडलर्स के पास रहता था, जो अक्सर अंतरराज्यीय और विदेशी साइबर अपराध सिंडिकेट से जुड़े होते हैं। इन खातों का उपयोग धोखाधड़ी का पैसा प्राप्त करने, लेन-देन की परतें बनाने और जांच से बचने के लिए धन को दूसरी जगह भेजने के लिए किया जाता था।

दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि वे अनजान व्यक्तियों के साथ अपने बैंक खाते या केवाईसी विवरण साझा न करें और न ही असत्यापित कंपनियों में निदेशक बनने के लिए सहमत हों। अधिकारियों ने पीड़ितों से आग्रह किया है कि वे साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्ट तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 या आधिकारिक साइबर अपराध पोर्टल के माध्यम से करें।

 

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