हैदराबाद | आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच टेक दिग्गज मेटा (फेसबुक) ने अपने कार्यबल में भारी कटौती का ऐलान किया है। मार्क जुकरबर्ग की कंपनी ने आंतरिक मेमो के जरिए संकेत दिए हैं कि वह अपने कुल स्टाफ का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा कम करने जा रही है, जिससे करीब 8,000 कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है। छंटनी की यह प्रक्रिया 20 मई से शुरू होने की संभावना है। कंपनी का तर्क है कि वह खुद को अधिक “स्मार्ट” और कुशल बनाना चाहती है, जिसके लिए न केवल छंटनी की जा रही है, बल्कि 6,000 रिक्त पदों को भी भविष्य में न भरने का निर्णय लिया गया है।
दूसरी ओर, माइक्रोसॉफ्ट ने सीधे छंटनी के बजाय अपने कर्मचारियों को ‘वॉलंटरी बायआउट’ यानी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प दिया है। अमेरिका में कार्यरत लगभग 7 प्रतिशत स्टाफ को यह ऑफर दिया गया है, जिसे स्वीकार करने पर करीब 8,750 कर्मचारी कंपनी से अलग हो सकते हैं। माइक्रोसॉफ्ट अब अपना पूरा ध्यान और वित्तीय संसाधन डेटा सेंटर बनाने और एआई तकनीकों को और अधिक उन्नत करने पर केंद्रित कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां अब पारंपरिक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के बजाय एआई-आधारित कौशल वाले पेशेवरों को तरजीह दे रही हैं, जिससे पुराने स्किल सेट वाले पदों पर संकट गहरा गया है।
नौकरियों पर यह संकट केवल मेटा और माइक्रोसॉफ्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि केपीएमजी (KPMG) जैसी बड़ी कंसल्टिंग फर्में भी अपने ऑडिट पार्टनर्स की संख्या में 10 प्रतिशत की कमी कर रही हैं। कंपनियों का मानना है कि एआई टूल्स की मदद से अब कम लोग अधिक काम कर पा रहे हैं, जिससे लागत घटाने के लिए छंटनी ही एकमात्र विकल्प बचा है। यह घटनाक्रम आईटी क्षेत्र में काम करने वाले लाखों युवाओं के लिए एक चेतावनी है कि अब केवल डिग्री के भरोसे करियर सुरक्षित नहीं है। भविष्य की दौड़ में बने रहने के लिए खुद को एआई और नई तकनीकों के साथ लगातार अपडेट रखना अनिवार्य हो गया है।

