
सतना : जिला चिकित्सालय के ट्रामा सेंटर भवन के प्रथम तल पर बनाए गए आईसीयू के दोनों वार्ड में लगी वातानुकूलन की व्यवस्था एक बार फिर से ध्वस्त होती नजर आने लगी है. यह समस्या पिछले साल भर में कई बार सिर उठा चुकी है. लेकिन हर बार मेंटिनेंस के नाम पर होने वाले लंबे चौड़े खर्च के बावजूद कोई ठोस हल सामने नहीं आ सका है.इन दिनों जारी भीषण गर्मी में जहां सामान्य स्वास्थ्य वाला व्यक्ति भी बेचैन नजर आ रहा है. वहीं दूसरी ओर जिला चिकित्सालय के आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों की जान सांसत में है.
दरअसल आईसीयू फस्र्ट और सेकेंड में स्थापित सेट्रलाइज्ड एसी सिस्टम एक बार फिर से दगा दे चुका है. जिसके चलते वहां पर भर्ती मरीजों के लिए सांस लेना तक दूभर होता जा रहा है. जबरदस्त गर्मी और चारों ओर से बंद होने के कारण आईसीयू में भर्ती मरीजों के लिए वहां का माहौल दमघोंटू साबित हो रहा है. हलांकि अस्पताल प्रबंधन द्वारा एसी की मरम्मत के लिए संबंधित कंपनी के इंजीनियर से संपर्क किया गया है.
लेकिन उक्त इंजीनियर कब तक उपलब्ध होगा और उसके उपलब्ध होने के बाद एसी की मरम्मत के लिए लगने वाले कल पुर्जे मिल पाएंगे अथवा नहीं, यह आने वाले समय में मालुम हो सकेगा. पिछले वर्ष भी जबरदस्त उमस भरी गर्मी पडऩे के दौरान भी आईसीयू के एसी सिस्टम फेल हो गए थे. उस दौरान संबंधित इंजीनियर से बार बार संपर्क करने के बावजूद भी कोई हल नहीं निकल पाने पर वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए आरएमओ डॉ. शरद दुबे द्वारा खिड़कियों को खुलवाकर वहां पर बड़े कूलर रखवाए गए थे. कुछ दिनों बाद एसी की मरम्मत हो जाने पर व्यवस्था बहाल कर दी गई थी.
लंबा-चौड़ा बजटप्राप्त जानकारी के अनुसार जिला चिकित्सालय के आईसीयू सहित अन्य सभी वार्डों में लगे एसी की मरम्मत का खर्च प्रति वर्ष लगभग 15 लाख रु बैठता है. लेकिन इसके बावजूद भी व्यवस्था में ठोस सुधार होता नजर नहीं आ रहा है. पिछले वर्ष आईसीयू में इसी तरह की समस्या आने पर मामला कलेक्टर डॉ. सतीष कुमार एस द्वारा संज्ञान में लिया गया था. कलेक्टर द्वारा यह निर्देश भी दिए गए थे कि अस्पताल में बड़ी क्षमता के कम से कम 2 ऐसे एसी रखे जाएं, जिन्हें आवश्यकता पडऩे पर शिफ्ट भी किया जा सके. लेकिन तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. एल के तिवारी और सिविल सर्जन डॉ. मनोज शुक्ला द्वारा इस विकल्प पर विशेष तवज्जो नहीं दी गई. नतीजतन अब आईसीयू का सेट्रलाइज्ड एसी सिस्टम फेल होने पर अस्पताल प्रशासन के सामने कोई विकल्प नहीं बचा है.
