समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी व्यवस्था लडख़ड़ाई

सीहोर। जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी व्यवस्था के लडख़ड़ाने से किसानों को मजबूरन मंडी का रुख करना पड़ रहा है. स्लॉट बुकिंग में आ रही तकनीकी अड़चनों और खरीदी केंद्रों की सुस्ती ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. नतीजा यह है कि जहां उन्हें समर्थन मूल्य 2625 रुपए प्रति क्विंटल मिलना चाहिए, वहीं मंडी में 2000 से 2500 रुपए प्रति क्विंटल तक के कम दामों पर अपनी फसल बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है.

दरअसल, इस बार शासन द्वारा लागू स्लॉट बुकिंग सिस्टम किसानों के लिए सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आया है. छोटे किसानों को प्राथमिकता देने का दावा किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है. 4 से 5 एकड़ तक के किसान भी स्लॉट के लिए भटक रहे हैं, जबकि बड़े किसानों की उपज खरीदी अब तक शुरू ही नहीं हो सकी है. ऐसे में समय पर भुगतान और फसल खराब होने के डर से किसान खुले बाजार का रुख करने को मजबूर हैं.

जिले के अधिकतर खरीदी केंद्रों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है. जहां पिछले वर्षों में इन केंद्रों पर ट्रैक्टर-ट्रॉली की लंबी कतारें देखने को मिलती थीं, वहीं इस बार कई केंद्र सूने पड़े हैं. इन केन्द्रों पर दिनभर में गिनी-चुनी ट्रॉलियां ही पहुंच रही हैं. इससे न केवल खरीदी की रफ्तार प्रभावित हुई है, बल्कि तुलावटियों और मजदूरों के सामने भी काम का संकट खड़ा हो गया है.

समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी में आ रही अड़चनों के चलते किसान मंडी का रुख कर रहे हैं. नतीजतन कृषि उपज मंडी में गेहूं की आवक लगातार बढ़ रही है. प्रतिदिन 10 से 15 हजार क्विंटल अनाज मंडी पहुंच रहा है, जिसमें 5 से 7 हजार क्विंटल गेहूं शामिल है. अधिक आवक के चलते बाजार में दामों पर दबाव बना हुआ है. व्यापारी इसका फायदा उठाते हुए कम कीमतों पर खरीद कर रहे हैं, जिससे किसानों को सीधा नुकसान झेलना पड़ रहा है.

स्थिति को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि कुछ वेयरहाउसों में नियमों को ताक पर रखकर बड़े किसानों का गेहूं अवैध रूप से डंप किए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं. इससे न केवल पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि छोटे किसानों के साथ अन्याय की स्थिति भी बन रही है.

किसानों पर इस समय आर्थिक दबाव चरम पर है. उधारी चुकाने, शादी-ब्याह और अगली फसल की तैयारी के लिए उन्हें तुरंत नगदी की जरूरत है. ऐसे में वे समर्थन मूल्य का इंतजार करने के बजाय कम दामों पर ही फसल बेचने को मजबूर हो रहे हैं. इससे उनमें मायूसी का माहौल बना है.

प्रशासन का कहना है कि जिले में इस वर्ष 240 खरीदी केंद्र बनाए गए हैं और 1,02,485 किसानों ने पंजीयन कराया है। करीब 7 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन बुधवार तक केवल 25 हजार किसानों से 1.33 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी ही हो सकी है, जो लक्ष्य के मुकाबले काफी धीमी है. सहायक जिला आपूर्ति अधिकारी आकाश चंदेल के अनुसार स्लॉट बुकिंग में तकनीकी समस्याएं सामने आई थीं, जिन्हें अब दूर किया जा रहा है.उनका दावा है कि जल्द ही खरीदी व्यवस्था पटरी पर लौटेगी. हालांकि मौजूदा हालात में किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब तक व्यवस्था सुधरेगी, तब तक उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य कैसे मिल सकेगा.

औचक निरीक्षण के दौरान देखने को मिली कई खामियां

जावर. गेहूं उपार्जन व्यवस्था को सुचारू, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाए रखने के उद्देश्य सगत दिवस तहसीलदार ओमप्रकाश चोरमा ने विभिन्न उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान कई केंद्रों पर व्यवस्थाओं में कमियां सामने आईं, जिन्हें तत्काल सुधारने के निर्देश दिए गए. तहसीलदार ने अंबिका वेयरहाउस ग्वाला, पटेल वेयरहाउस ग्वाला, महाकाल वेयरहाउस भंवरीकला, पटेल वेयरहाउस कान्याखेड़ी तथा मां सावत्रा वेयरहाउस कजलास का निरीक्षण किया. उन्होंने केंद्रों पर गेहूं की तुलाई प्रक्रिया, बारदानों की उपलब्धता और किसानों के लिए पेयजल, छाया एवं बैठने जैसी सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया.निरीक्षण के दौरान तहसीलदार ने केंद्र प्रभारियों और सर्वेयर को सख्त निर्देश दिए कि उपार्जन कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि तुलाई में पारदर्शिता और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करना प्राथमिकता है.

 

 

 

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