वॉशिंगटन | अमेरिकी सांसद ब्रैड शेरमैन ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को सख्त चेतावनी देते हुए लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों पर नकेल कसने की अपील की है। वॉशिंगटन में भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित ‘आतंकवाद की मानवीय कीमत’ प्रदर्शनी में शेरमैन ने 2025 के पहलगाम हमले को याद किया, जिसमें 26 निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ जैसे गुटों को पाकिस्तान में पनाह मिली हुई है, जो सीधे तौर पर लश्कर से जुड़े हैं। कैपिटल हिल पर हुई इस डिजिटल प्रदर्शनी में 1993 के मुंबई धमाकों से लेकर हालिया हमलों तक की विभीषिका को दिखाया गया, जिसमें रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के सांसदों ने हिस्सा लिया।
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने इस अवसर पर कहा कि आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है और दुनिया को इसे हराने के लिए एकजुट होना होगा। कार्यक्रम में भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी उल्लेख किया गया, जो 7 मई, 2025 को सीमा पार आतंकी ढांचे को तबाह करने के लिए शुरू किया गया था। इस सैन्य अभियान के तहत लश्कर और जैश के नौ ठिकानों को पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया था। सांसदों ने माना कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए एक मिसाल है।
प्रदर्शनी के दौरान अमेरिकी सांसदों ने खुफिया जानकारी साझा करने और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। सांसद रो खन्ना ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की चेतावनियों को याद करते हुए कहा कि आतंकवाद किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आजादी और लोकतंत्र के लिए वैश्विक खतरा है। वहीं, सांसद लिसा मैकक्लेन और रिचर्ड मैककॉर्मिक ने आतंकवाद को एक ‘अनोखी बुराई’ बताते हुए भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने की प्रतिबद्धता दोहराई। वक्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती पर मौजूद आतंकवादी फैक्ट्रियों को बंद नहीं करता, तब तक क्षेत्र में स्थायी शांति संभव नहीं है।

