इंदौर: शहर में भीषण गर्मी के बीच जल संकट गहरा गया है, यूं तो पानी की समस्या पूरे शहर में व्याप्त है. लेकिन वार्ड क्रमांक 40 के धीरज नगर में जल संकट ने विकराल रूप धारण कर लिया है. यहां के रहवासी एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं. दो साल पहले यहां नर्मदा लाइन बिछाई गई थी, इसके बावजूद पानी नहीं आ रहा है, कहीं आ भी रहा है तो वह इतने कम प्रेशर से आ रहा है कि लोगों का गुजारा मुश्किल हो रहा है. जलसंकट से रहवासी परेशान हैं, लेकिन निगम अधिकारियों की कथित लापरवाही के कारण यह समस्या जस की तस बनी हुई है.
पूर्वी रिंग रोड स्थित वेलोसिटी टॉकीज के पीछे धीरज नगर सहित कई इलाकों में, जहां पुरानी पाइपलाइन बंद है और नई लाइन का लाभ नहीं मिल रहा है, निवासियों को गंदे पानी या टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. लेकिन सरकारी टैंकर अपर्याप्त हैं और जो आ रहे हैं, वे कंडम व गंदे हैं. लोग इन टैंकरों का पानी पीने से डर रहे हैं. बैकलाइन ड्रेनेज पर अवैध कब्जों के कारण ड्रेनेज लाइन और नर्मदा पाइपलाइन एक साथ होने से सीपेज के कारण पानी दूषित हो रहा है.
धीरज नगर की गली नंबर 1 में नर्मदा लाइन पूरी तरह बंद है. रहवासियों ने बताया कि वे पिछले 30 वर्षों से यहां रह रहे हैं, लेकिन अब तक नियमित जलापूर्ति नहीं मिली. मजबूरी में लोग निजी टैंकरों पर निर्भर हैं. स्थिति और गंभीर तब हो गई, जब गली में लगाया गया सरकारी बोरिंग भी सूख गया. ऐसे में लोगों को दूर-दराज के क्षेत्रों से पानी लाना पड़ रहा है, जबकि वार्ड में ही पानी की विशाल टंकी मौजूद है. पानी की किल्लत को लेकर स्थानीय लोगों में व्यवस्था को लेकर नाराजगी है. सभी चाहते हैं कि पानी की किल्लत की समस्या का जल्द समाधान हो.
यह बोले रहवासी
मैं यहां 30 साल से रह रहा हूं, तब से ही पानी की समस्या बनी हुई है. दो वर्ष पहले ही नर्मदा पानी की लाइन डाली गई, लेकिन वह अभी तक चालू ही नहीं हुई.
– कविता मालवीय
पानी की बड़ी समस्या बनी हुई है, आसपास के क्षेत्र में जाकर पानी लाना पड़ता है, जबकि वार्ड में ही विशाल पानी की टंकी बनी हुई है. बंद लाइन के पॉइंट चेक किए जाने चाहिए, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है.
– रवि सिंह
सरकारी बोरिंग पूरी तरह से सूख चुका है. निगम के पानी के टैंकर भी बहुत कम आते हैं, उससे भी पानी की पूर्ति नहीं होती. मजबूरी में हजार रुपए प्रति टैंकर हमें पानी लेना पड़ता है.
– पदमा गुज्जर
