नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (वार्ता) हीरे के कारोबार में दुनिया की प्रमुख कंपनी की एक रिपोर्ट के अनुसार जेन-ज़ेड (18-28 की युवा पीढ़ी) और स्वयं खरीदारी में प्रवृत्त महिलाओं ने भारत के हीरा बाजार में एक क्रांति ला दी है जिससे चीन तथा जापान को छोड़ कर देश प्राकृतिक हीरे के आभूषणाें का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बन गया है।
हीरा बाजार पर डी बीयर्स इंडिया की डायमंड एक्विज़िशन स्टडी (डीएएस) के अनुसार, “भारतीय हीरा आभूषण बाज़ार एक परिवर्तनकारी दौर में प्रवेश कर चुका है और आधिकारिक रूप से चीन और जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार बन गया है।’
रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक मांग में 12 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ, भारत का प्राकृतिक हीरे का आभूषण बाज़ार इस समय सालाना 497 अरब रुपये का है और 2030 तक 1,500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘ इस वृद्धि के पीछे उपभोक्ता व्यवहार में एक बड़ा बदलाव है, जिसे नई पीढ़ी के खरीदार आगे गति दे रहे हैं, जो हीरों को निष्क्रिय संपत्ति नहीं बल्कि अपनी दैनिक पहचान का अहम हिस्सा मानने लगा हैं। देश में प्राकृतिक हीरे के आभूषणों की खरीदारी में 51 प्रतिशत हिस्सा 18-28 वर्ष के आयु वर्ग के युवाओं का है। खरीद में उनकी हिस्सेदारी 2022 की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक हो गयी है।
महंगी खरीदारी का शौकीन यह वर्ग प्रति आभूषण औसतन 1,98,000 रुपये खर्च कर रहा है, जो उच्च खरीद दर और असली लक्ज़री की चाह से प्रेरित है। मिलेनियल्स (30-35 के आयुवर्ग) के साथ मिलकर ये दोनों पीढ़ियां भारतीय हीरा आभूषण बाज़ार में 86 प्रतिशत खरीद कर रही है जो इसके दीर्घकालिक विस्तार का संकेत है। इस रिपोर्ट के अनुसार 2014 में, 56 प्रतिशत हीरे के आभूषण केवल विशेष अवसरों के लिए रखे जाते थे और केवल 27 प्रतिशत रोज़ाना पहने जाते थे। आज 52 प्रतिशत आभूषण रोज़ाना पहने जा रहे हैं। शादी से के इतर 64 प्रतिशत प्राकृतिक हीरे के आभूषण महिलाएं अपने लिए खरीदती हैं। शादी की खरीद का हिस्सा 29 प्रतिशत है और उसमें भी 79 प्रतिशत निर्णय दुल्हनों द्वारा स्वयं की गई खरीद का है।
डी बीयर्स ग्रुप की ग्लोबल वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्वेता हरित ने कहा: “भारत का दुनिया के दूसरे सबसे बड़े हीरा बाज़ार के रूप में उभरना, भारतीय उपभोक्ताओं के प्राकृतिक हीरे के साथ गहरे भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रमाण है। वैश्विक बाज़ारों के बदलते दौर में भारत वृद्धि का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है, जिसे एक ऐसी पीढ़ी आगे बढ़ा रही है जो प्रामाणिकता और दुर्लभता को महत्व देती है। भारत अब वैश्विक मांग का प्रमुख चालक बन चुका है।”
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के हीरा उद्योग का भविष्य और भी मजबूत दिखाई देता है। 2030 तक उच्च-आय वाले परिवारों में 16 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है, जिससे प्राकृतिक हीरा आभूषण की मांग जीवनशैली के प्रतीक और निवेश के रूप में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी।
डी बीयर्स समूह 1888 से बाजार में है और दुनिया की अग्रणी हीरा कंपनी है। बोत्सवाना, कनाडा, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका में इसकी हीरे की खानें हैं।
