कोलकाता, 21 अप्रैल (वार्ता) पश्चिम बंगाल की 152 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान के लिए चुनाव प्रचार मंगलवार शाम को समाप्त हो गया।
इन सभी निर्वाचन क्षेत्रों में आज शाम छह बजे माइक्रोफोन बंद हो गए, रैलियां थम गईं और घर-घर जाकर प्रचार करना बंद हो गया, जो पहले चरण के लिए प्रचार अभियान की समाप्ति का प्रतीक है।
चुनाव आयोग द्वारा 15 मार्च को चुनावों की घोषणा के बाद शुरू हुआ जोरदार अभियान पिछले 37 दिनों में चरम पर पहुंच गया क्योंकि प्रतिस्पर्धी पार्टियों के शीर्ष नेताओं ने मतदाताओं को लुभाने के लिए रैलियां, रोड शो आयोजित किए और सार्वजनिक सभाओं एवं नुक्कड़ों को संबोधित किया।
भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और कई केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने किया। विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी और पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई के प्रमुख शमिक भट्टाचार्य जैसे वरिष्ठ राज्य नेताओं ने भी पार्टी उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया।
वहीं तृणमूल कांग्रेस के चुनाव प्रचार का नेतृत्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने किया जबकि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी कई रैलियां कीं। कांग्रेस के चुनाव अभियान का नेतृत्व राहुल गांधी और पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने किया।
पहले चरण के सबसे चर्चित मुकाबलों में से एक नंदीग्राम का है जहां भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी टीएमसी, कांग्रेस और माकपा के उम्मीदवारों सहित कई विरोधियों के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। यह निर्वाचन क्षेत्र 2021 से ही राजनीतिक रूप से प्रतीकात्मक बना हुआ है। 152 निर्वाचन क्षेत्रों में से 54 उत्तरी बंगाल में हैं।
पहले चरण में उत्तर बंगाल के सभी आठ जिले शामिल होंगे जिसमें दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, कूच बिहार, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा शामिल है।
राज्य के पश्चिमी और मध्य भागों के कई जिलों जंगलमहल क्षेत्र के झाड़ग्राम, पुरुलिया और बांकुरा, तथा बीरभूम और मुर्शिदाबाद जिलों में भी पहले चरण में मतदान होगा। पूर्वी मिदनापुर और पश्चिमी मिदनापुर में भी पहले चरण में मतदान होना है।
