ओडिशा में वोटर लिस्ट से 9.8 लाख नाम गायब होने पर मचा हड़कंप, चुनाव आयोग ने बैठाई उच्च स्तरीय जांच: स्पेशल रिवीजन से पहले मैपिंग प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही आई सामने

भुवनेश्वर | ओडिशा में मतदाता सूची से करीब 9.8 लाख नाम गलत तरीके से हटाए जाने की शिकायतों के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अख्तियार किया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने इस मामले में जांच के आदेश देते हुए फाइनल वोटर लिस्ट तैयार करने से पहले कड़े भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के निर्देश जारी किए हैं। शिकायतों में सामने आया है कि कई जीवित मतदाताओं के नाम भी सूची से हटा दिए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) द्वारा बिना फील्ड विजिट किए नाम हटाना नियमों का उल्लंघन है और इसकी जवाबदेही तय की जाएगी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) से यह प्रमाण मांगा गया है कि कम से कम 50 प्रतिशत मामलों का घर-घर जाकर सत्यापन किया गया है या नहीं। आयोग ने निर्देश दिया है कि किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसके अंतिम ज्ञात पते पर नोटिस भेजना अनिवार्य होगा, चाहे मामला मृत्यु का हो या पते के बदलाव का। वर्तमान में प्राप्त करीब दो लाख फॉर्म-7 आवेदनों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। राज्य में इलेक्टोरल मैपिंग के दौरान मिली इन खामियों को दूर करने के लिए ईमेल और 1950 कॉल सेंटर के जरिए भी निगरानी रखी जा रही है।

ओडिशा में पहले यह विशेष पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया 1 अप्रैल से शुरू होनी थी, लेकिन अब इसके मई 2026 में शुरू होने की संभावना है। CEO आर.एस. गोपालन ने बताया कि मृत या डुप्लीकेट नाम मिलने पर भी उन्हें सीधे हटाने का अधिकार किसी अधिकारी को नहीं है, इसके लिए उचित कानूनी प्रक्रिया और फॉर्म-7 पर पुष्टि अनिवार्य है। जिन मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दोबारा सूची में जोड़ा जाएगा। आयोग का लक्ष्य आगामी चुनावों से पहले एक पारदर्शी और त्रुटिहीन मतदाता सूची सुनिश्चित करना है।

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