नई दिल्ली/न्यूयॉर्क | वैश्विक स्तर पर जारी ईरान युद्ध, ऊर्जा संकट और मंदी की आहट के बीच संयुक्त राष्ट्र (UN) की इकाई ESCAP ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर उत्साहजनक रिपोर्ट जारी की है। ताजा अनुमान के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026 में भारत की जीडीपी (GDP) वृद्धि दर 6.4% रहने की उम्मीद है। इसके साथ ही भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था का खिताब बरकरार रखेगा। रिपोर्ट में भविष्यवाणी की गई है कि अगले वित्त वर्ष 2027 में यह विकास दर और बेहतर होकर 6.6% तक पहुंच सकती है। हालांकि, 2025 की 7.4% की दर के मुकाबले यह थोड़ी कम है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए भारत की स्थिति सबसे मजबूत बनी हुई है।
यूएन की रिपोर्ट में विकास दर में मामूली गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारणों को जिम्मेदार ठहराया गया है। फरवरी 2026 में शुरू हुए ईरान युद्ध की वजह से तेल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है। इसके अलावा, अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए भारी टैरिफ (50% टैक्स) ने निर्यात क्षेत्र के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं। वहीं, जनवरी 2026 से अमेरिका द्वारा ‘रेमिटेंस’ (विदेशों से भेजा जाने वाला धन) पर 1% टैक्स लगाने के फैसले से केरल, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों के परिवारों पर सीधा असर पड़ने की आशंका है, क्योंकि भारत को सालाना करीब 137 अरब डॉलर का रेमिटेंस प्राप्त होता है।
इन चुनौतियों के बावजूद, भारत ‘ग्रीनफील्ड निवेश’ (नए प्रोजेक्ट्स) के मामले में दुनिया भर के निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है। 2025 की शुरुआत में ही भारत ने 50 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आकर्षित किया, जो ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे विकसित देशों से कहीं अधिक है। वर्तमान में भारत में सोलर पावर, विंड एनर्जी और डेटा सेंटर जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में भारी पूंजी निवेश हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत घरेलू मांग और सरकारी बुनियादी ढांचा योजनाओं के कारण भारतीय बाजार में स्थिरता बनी हुई है, जो वैश्विक निवेशकों को सुरक्षित रिटर्न का भरोसा दिला रही है।

