इंदौर: नगर निगम को सुप्रीम कोर्ट ने विनियमित कर्मचारियों को समान काम समान वेतन देने के आदेश दिए थे. निगम द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश को दरकिनार कर सिर्फ 10 वीं और 12 वीं पास कर्मचारियों को ही पक्का किया जा रहा है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में ऐसा कहीं उल्लेख नहीं किया गया है कि 10 और 12 वीं पास को स्थाई किया जाए. उक्त मामले को लेकर आज श्रम न्यायलय में अवमानना याचिका की पेशी है.
नगर निगम विनियमित कर्मचारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट से ऑर्डर हुए थे कि समान काम समान वेतन के पात्र है विनियमित कर्मचारी भी. कोर्ट ऑर्डर के हिसाब से सभी 2001 तक के विनियमित कर्मचारी को समान काम समान वेतन के हिसाब से 1391 कर्मचारी को पक्का करना था. वर्तमान में 1391 कर्मचारी में से 970 कर्मचारी ही बचे हैं, इनमें कुछ की मृत्यु और अन्य कारणों से नौकरी से बाहर हो चुके हैं.
निगम कमिश्नर ने 7 लोगों की टीम बनाई थी और उन्हें समय सीमा में सभी कर्मचारी को पक्का करना था, लेकिन निगम के ही कुछ लोगों द्वारा निगम कमिश्नर को भ्रमित कर दिया गया. आयुक्त को झूठी और गलत जानकारी देकर जो 10 वीं और 12 वीं पास हैं, उन्हें ही पक्का करने की तैयारी हो चुकी है, जिसमें 488 कर्मचारी है. बाकी 482 कर्मचारी को शामिल नहीं किया गया है. उक्त 482 कर्मचारियों को स्थापना विभाग एवं लेखा विभाग में भेजी गई सूची में शामिल नहीं किया गया है. उक्त मामले को लेकर अधिवक्ता ओमप्रकाश लटके द्वारा एसएलपी और अवमानना याचिका दायर की गई है. आज श्रम न्यायालय में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवेहलना और कर्मचारियों के साथ भेदभाव लगने पर सुनवाई है.
