भगवान विष्णु के छठवें अवतार का जन्मोत्सव मनाया

ब्यावरा। भगवान विष्णु के छठवें अवतार भगवान श्री परशुराम जी का जन्मोत्सव नगर सहित जिले भर में श्रद्धा, भक्तिभाव के साथ मनाया गया.

ब्राह्मण समाज के आराध्य देव भगवान परशुराम जी के जन्मोत्सव पर शोभायात्राएं निकाली, धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन हुए. शस्त्र और शास्त्र के धनि, भगवान श्री परशुराम जी के जन्मोत्सव पर जिले भर में आयोजन हुए. नगर में विशाल शोभायात्रा निकाली गई.

माँ वैष्णोदेवी मंदिर प्रांगण से जयकारों, ध्वज पताकाओं, बैंड बाजो के साथ शोभायात्रा प्रारंभ हुई. आकर्षक साथ चल रही थी. राजनीतिक, धार्मिक, सामाजिक, सेवाभावी संगठनों के द्वारा स्थान-स्थान पर पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया गया. पुराना बस स्टेण्ड, पीपल चौराहा, मैन मार्केट, सुभाष चौक से नपा कार्यालय के सामने, पुराना ए.बी.रोड, अहिंसा द्वार, इंदौर नाके से होते हुए शोभायात्रा बीड़ मंदिर के समीप भगवान परशुरामजी के मंदिर धाम पहुंची. जहां महाआरती के साथ धार्मिक, सामाजिक कार्यक्रम हुए. समाज के मेधावी बच्चों एवं वरिष्ठजनों का सम्मान किया गया.

वक्ताओं ने कहा कि परशुरामजी का जीवन हमें सिखाता है कि शक्ति का उपयोग हमेशा धर्म की स्थापना और मानवता की सेवा के लिए होना चाहिए. उनका जीवन हमें सत्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है. उनके आदर्शो को अपने जीवन में उतारने का संकल्प ले. इस दौरान बड़ी संख्या में समाज बंधु उपस्थित रहे.

खासा उत्साह नजर आया

भगवान परशुरामजी के जन्मोत्सव को लेकर नगर में काफी उत्साह देखा गया. भगवान परशुराम जी के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया. नगर में निकली शोभायात्रा का जगह-जगह मंच लगाकर स्वागत किया गया. कहीं शीतल पेय वितरित किए गए तो कहीं पुष्पवर्षा कर स्वागत किया.

संस्कार और शिक्षा के संदेश

मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में समाज के पदाधिकारी, धर्मगुरु और गणमान्य नागरिकों ने अपने विचार रखे. वक्ताओं ने बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने, उन्हें शिक्षा के प्रति जागरूक बनाने और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने पर जोर दिया. कहा कि ब्राह्मण समाज सदैव सभी समाजों को साथ लेकर चलने की परंपरा निभाता आया है और यही भावना नई पीढ़ी में भी विकसित की जानी चाहिए. वक्ताओं ने यह भी कहा कि बच्चों को कर्मकांड, परंपराओं और संस्कृति का ज्ञान देना आवश्यक है, ताकि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहे. साथ ही आधुनिक शिक्षा के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर और सक्षम बनाना भी उतना ही जरूरी है. कहा गया कि बच्चों को बुराइयों, कुरीतियों से दूर रखते हुए उन्हें सही मार्गदर्शन दें.

 

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