
रीवा। तमाम अव्यवस्थाओं के बीच गेंहू खरीदी कागजो में शुरू की गई है लेकिन तीन दिन तक कही भी खरीदी का खाता नही खुला. 15 अप्रैल से जिले के 168 खरीदी केन्द्रो में खरीदी शुरू की गई है लेकिन तीन दिन तक कोई तौल नही हुई.
किसान भी अभी कोई रूचि नही ले रहे है. इस बार गेहूं खरीदी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बारदानों की अनुपलब्धता बनकर उभरा है. नागरिक आपूर्ति निगम (नॉन) के पास नए बारदानों का अभाव है, और पुराने बारदाने अभी भी धान की पैकिंग में फंसे हुए हैं. जिले के लगभग सभी गोदाम पिछले सीजन की धान से पूरी तरह भरे हुए हैं. नियमानुसार धान की मिलिंग के लिए उठाव होना था, जिससे बारदाने खाली होते और उनका उपयोग गेहूं खरीदी में किया जाता. लेकिन मिलिंग की कछुआ चाल ने पूरी व्यवस्था को ठप कर दिया है. नागरिक आपूर्ति निगम के पास न तो नए बारदानों का पर्याप्त स्टॉक है और न ही पुराने बारदानों को खाली कराने की कोई ठोस योजना. गेहूं की फसल कटकर तैयार है और मंडियों में आने को बेताब है. ऐसे में अगर समय पर खरीदी शुरू नहीं हुई, तो किसानों को अपनी उपज कम दामों पर बिचौलियों को बेचने पर मजबूर होना पड़ेगा. साथ ही, मौसम के बदलते मिजाज ने भी किसानों की धडक़नें बढ़ा दी हैं. खुले में रखा अनाज बारिश की भेंट चढ़ सकता है. धान का उठाव अगर समय रहते नहीं हुआ, तो इस साल गेहूं की खरीदी का लक्ष्य पूरा करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा. कलेक्टर और जिला प्रशासन ने 15 अप्रैल से सुचारू खरीदी के दावे किए थे, लेकिन हकीकत में खरीदी केंद्रों के प्रभारी केवल टालमटोल कर रहे हैं. सब कुछ कागज में चल रहा है.
