एसबीसी चुनाव: नामांकन निरस्त होने से गर्माया मामला

जबलपुर। स्टेट बार काउंसिल ऑफ मध्य प्रदेश के चुनाव में उन 11 प्रत्याशियों के नामांकन निरस्त हो गए हैं, जो किसी न किसी बार एसोसिएशन के पदाधिकारी हैं। इसे लेकर प्रत्याशियों में भारी आक्रोश है। प्रत्याशियों ने आरोप लगाए हैं कि चुनाव समिति ने नियम के विपरीत जाकर नामांकन रिजेक्ट किए हैं। प्रत्याशियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर कर दी है, जिस पर सोमवार को सुनवाई होगी।

शुक्रवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष डीके जैन ने कहा कि स्टेट बार के वर्तमान पदाधिकारियों के दबाव में चुनाव समिति कार्य कर रही है। वोटर लिस्ट से हजारों नाम काट दिए गए और सुधारने के लिए समय नहीं दिया गया। हाईकोर्ट बार सचिव परितोष त्रिवेदी ने कहा कि फॉर्म में अंडरटेकिंग ली गई कि यदि चुनाव जीतते हैं तो एक पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। इसके बावजूद यह कहकर नामांकन निरस्त कर दिया कि नियम का उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने पुराने नियम को बदलने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया को एक सप्ताह का समय दिया था, जो कि नहीं किया गया। जिला बार अध्यक्ष मनीष मिश्रा एवं उपाध्यक्ष ज्योति राय ने कहा कि चुनाव समिति स्वयं नियम का पालन नहीं कर रही है। पहले कहा गया कि किसी भी स्थिति में नामांकन की फीस (सवा लाख रुपए) वापस नहीं किए जाएंगे और फॉर्म रिजेक्ट करने के बाद फीस वापसी की बात कही है। सभी ने एकमत होकर मांग की है कि चुनाव समिति को इस्तीफा देना चाहिए। पदाधिकारियों ने बताया कि चुनाव समिति में पूर्व मुख्य न्यायाधीश, सेवानिवृत्त जज और वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। इन्हें क्रमशरू साढ़े 4 लाख, साढ़े तीन लाख और ढाई लाख रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। चुनाव में करीब 6 माह का समय लगेगा। दो पन्नों का नामांकन फॉर्म था, जिसकी कीमत 5 हजार रुपए वसूल की गई थी।

 

मैदान में बचे 119 प्रत्याशी

निर्वाचन अधिकारी जस्टिस एसके पालो ने बताया कि स्टेट बार चुनाव के लिए कुल 138 नामांकन दाखिल हुए थे। जांच के उपरांत कुछ कारणों से 19 नामांकन निरस्त कर दिए गए हैं। इनमें से 11 विभिन्न संघों के पदाधिकारी हैं, तीन के विरुद्ध अनुशासन समिति के समक्ष प्रकरण लंबित हैं। पांच के आपराधिक मामलों के कारण कार्रवाई की गई है। विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जमा की गई नामांकन शुल्क राशि एक लाख 25 हजार रुपये नियमानुसार निर्वाचन अधिकारी द्वारा वापस करने का आदेश दिया गया है। इच्छुक अभ्यर्थी इस आदेश के विरुद्ध स्टेट बार, जबलपुर की हाई पावर्ड इलेक्शन समिति के समक्ष नियमानुसार अपील प्रस्तुत कर सकते हैं।

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