
जबलपुर। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, कैट की युगलपीठ ने तीन राज्य पुलिस अधिकारियों के हक में राहतकारी अंतरिम आदेश पारित किया। इसके तहत भारतीय पुलिस सेवाए आईपीएस के दावे पर विचार करने के निर्देश दिए हैं। इस बीच यथास्थिति बकरार रखने की व्यवस्था दी गई है। साथ ही केंद्र व राज्य शासन सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने निर्देशित किया गया है।
याचिकाकर्ता जबलपुर में पदस्थ एडिशनल एसपी जितेंद्र सिंह के अलावा सत्येंद्र सिंह तोमर व महेश कुमार वैश्य की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे व अक्षय खंडेलवाल ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता 1998 बैच के राज्य पुलिस अधिकारी हैं। उन्हें 56 वर्ष की आयु सीमा पार करने के कारण आईपीएस के दावे से बाहर किया जा रहा है। दरअसल, ओवरएज होने की वजह याचिकाकर्ता पात्र नहीं हैं बल्कि केंद्र व राज्य शासन ने प्रत्येक पांच वर्ष में किए जाने वाले अनिवार्य कैडर रिव्यू में विलंब किया है। नियमानुसार कैडर रिव्यू 2018 में होना था, लेकिन 2022 में चार वर्ष के विलंब से किया गया। इस विलंब के कारण आवेदक नियत आयु सीमा पार कर दिए। इस वजह से उनका वैधानिक अधिकार प्रभावित हुआ है। आवेदक 26-27 वर्ष की सेवा पूरी करने के आधार पर आईपीएस कैडर के पात्र हैं। जिस कारण शासन-प्रशासन के स्तर पर हुए विलंब के लिए उन्हें नुकसान पहुंचाना अनुचित है। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये।
