अभिभाषण पर धन्यवाद: ज्ञान से ज्ञानी बनने की विकास यात्रा का प्रतीक है हमारा बजट- सीएम डॉ यादव

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राज्यपाल मंगुभाई पटेल द्वारा दिए गए अभिभाषण पर गुरूवार को सदन में धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि हम सबके कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हैं। मध्यप्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य है, जिसने रोलिंग बजट की अवधारणा विकसित की। हमारी सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रूपए का बजट प्रस्तुत किया है। यह एक रोलिंग बजट है, जिसमें आगामी वर्षों की कार्ययोजना भी समाहित है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘GYAN’ (गरीब, युवा, नारी और किसान) का मंत्र दिया था, हमने उसमें आई फॉर इंडस्ट्रियलाइजेशन और आई फॉर इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़कर ज्ञानी यानी (GYANII) बनाया है। उन्होंने कहा कि हमारा बजट ज्ञान (GYAN) पाकर ज्ञानी (GYANII) बनने की विकास यात्रा का प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था पर अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था एक बार फिर मजबूत, संतुलित और भविष्योन्मुखी है। हमारी सरकार ने मध्यप्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा और दूरदर्शी बजट प्रस्तुत किया है। यह 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रूपए की वह आधारशिला है, जिस पर 2047 के स्वर्णिम मध्यप्रदेश की भव्य इमारत खड़ी होगी। मध्यप्रदेश देश का वह पहला राज्य बना है, जिसने ‘रोलिंग बजट’ (Rolling Budget) की साहसी और दूरदर्शी पहल की है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्यपाल के भाषण पर कृतज्ञता व्यक्त कर सदन के सदस्यों द्वारा उठाए गए प्रश्नों का जवाब देते हुए कहा कि गत वर्ष हमने आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में इतिहास रचा है। तय सीमा से पहले मध्यप्रदेश ने लाल सलाम को आखिरी सलाम किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कुशल मार्गदर्शन में 31 मार्च की डेड लाइन से पहले ही मध्यप्रदेश में 35 वर्षों से चली आ रही नक्सलवाद की समस्या का पूर्णतः खात्मा कर दिया गया है। वर्ष 2025 में 10 नक्सलवादी मुठभेड़ों में मारे गए और 13 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इससे प्रभावित क्षेत्रों में भय का वातावरण समाप्त हुआ और विकास के नए द्वार खुले।

स्वास्थ्य कल्याण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पिछला वर्ष स्वास्थ्य सुदृढ़िकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ है। प्रदेश में पीपीपी मॉडल पर नए मेडिकल कॉलेजों का भूमिपूजन कर चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को नई दिशा दी गई है। एयर एम्बुलेंस सेवा की शुरुआत, प्रदेश को मेडिकल टूरिज्म हब बनाने की दिशा में उठाए गए कदम और पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार ने आमजन के जीवन में सुरक्षा और विश्वास का वातावरण निर्मित किया है। चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश ने अभूतपूर्व प्रगति की है। प्रदेश में शासकीय मेडिकल कॉलेजों की संख्या 14 से बढ़कर 19 हो चुकी है। इंदौर में ईएसआईसी (ESIC) मेडिकल कॉलेज का संचालन प्रारंभ होना न केवल श्रमिक वर्ग, बल्कि प्रदेश के युवाओं के लिए भी चिकित्सा शिक्षा के नए अवसर सृजित करने वाला महत्वपूर्ण कदम है। वर्तमान में प्रदेश में एमबीबीएस की 5,550 तथा स्नातकोत्तर की 2,862 सीटें उपलब्ध हैं। साथ ही, पीपीपी मॉडल के माध्यम से धार, कटनी, बैतूल और पन्ना सहित 13 जिलों में जिला अस्पतालों को अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेजों में परिवर्तित किया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं का विकेंद्रीकरण सुनिश्चित हो रहा है। आयुष चिकित्सा को सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक ही वर्ष में 03 नवीन आयुर्वेद महाविद्यालयों को स्वीकृति प्रदान की गई है तथा उज्जैन में विकसित हो रही ‘मेडिसिटी’ भविष्य में वैश्विक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में स्थापित होने की दिशा में अग्रसर है। स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने हेतु 46,491 नवीन पदों की स्वीकृति दी गई है, साथ ही स्वास्थ्य संवर्ग में 3850 पदों की भर्ती प्रक्रिया प्रारम्भकी गई है। साथ ही, देहदान करने वाली पुण्य आत्माओं को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ के साथ राजकीय सम्मान प्रदान करने का निर्णय हमारी सरकार की मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

किसान कल्याण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। हमने इस वर्ष को अन्नदाता किसान कल्याण वर्ष के रूप में समर्पित करते हुए किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं। पिछला वर्ष मध्यप्रदेश में किसानों के अधिकार के लिए जाना जाएगा। किसानों को गेहूं खरीदी पर बोनस देकर बेहतर समर्थन मूल्य दिया गया, धान और सोयाबीन उत्पादक किसानों के खातों में हजारों करोड़ रुपये की सहायता राशि सीधे अंतरित की गई। भावांतर योजना ने सोयाबीन उत्पादक किसानों को उनके अधिकार का पैसा दिलाया है। आपदा में 24 लाख से अधिक किसानों के साथ हम परिवार की तरह साथ खड़े हुए। उन्होंने बताया कि धार पीएम मित्र पार्क एवं बीईएमएल के शिलान्यास ने “विकसित और आत्मनिर्भर” भारत के निर्माण में मध्यप्रदेश की आधारशिला रखी है। प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद वर्ष 2026-27 में 10.69 प्रतिशत की वृद्धि के साथ लगभग 18 लाख 48 हजार 274 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। यह संकेत है कि हमारी आर्थिक नीतियां सहीं दिशा में आगे बढ़ रही हैं। राज्य की प्रति व्यक्ति आय में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है, जो कागजों पर नहीं बल्कि धरातल में हमारी प्रतिबद्धता का परिणाम है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अन्नदाताओं के स्वाभिमान, समृद्धि और आत्मनिर्भरता को समर्पित करते हुए हमने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का संकल्प लिया है। 11 जनवरी 2026 से शुरू हुआ यह मिशन केवल कागजी घोषणा नहीं, बल्कि एक ऐसी ठोस कार्ययोजना है जो खेत से खलिहान तक बदलाव लाने का माध्यम बन रही है। कृषि एवं अलाइड सेक्टर के लिए हमने 88 हजार 910 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। हमारी सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके लिए 15 से अधिक विभाग समन्वित रूप से कार्य कर रहे हैं। कृषि को आधुनिक तकनीक, नवाचार और कृषि आधारित उद्योगों से जोड़ते हुए इसे लाभकारी बनाने का व्यापक अभियान प्रारंभ किया गया है। प्राकृतिक खेती, कृषि पर्यटन और एलाइड सेक्टर को सशक्त बनाकर कृषि को समग्र विकास की दिशा दी जा रही है। हमने भावान्तर योजना के अंतर्गत सोयाबीन उत्पादक लगभग 7 लाख 17 हज़ार किसानों के खाते में फरवरी तक 1500 करोड़ रुपए की राशि का अंतरण किया। हमने मूंग, चना और सरसों का रिकॉर्ड उपार्जन सुनिश्चित कर अन्नदाता को बड़ी राहत दी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर 9 लाख 5 हजार किसानों से 77 लाख 74 हजार मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन किया गया। 20 हजार 213 करोड़ की राशि का भुगतान किया गया। इसके अतिरिक्त 1 हजार 360 करोड़ का बोनस भुगतान किया गया। धान उत्पादन 7 लाख 62 हजार किसानों से 51 लाख 74 हजार मीट्रिक टन धान का उपार्जन कर 11 हजार 744 करोड़ रुपए का भुगतान हमने किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के विजन को आगे बढ़ाते हुए हमने रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के तहत कोदो-कुटकी उगाने वाले जनजातीय भाइयों को 1 हजार रुपये प्रति क्विंटल की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देकर उन्हें आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ा है।

आर्थिक विकास

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रचलित मूल्यों पर मध्यप्रदेश देश की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले प्रदेशों में से है। वर्ष 2025-26 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद 16 लाख 69 हज़ार 750 करोड़ रुपये। वर्ष 2026-27 में राज्य का सकल घरेलु उत्पाद 18 लाख 48 हजार 274 करोड़ रुपए अनुमानित है, जो वर्ष 2025-26 के अनुमान में 10.69 प्रतिशत अधिक है। मध्यप्रदेश की प्रति व्यक्ति आय में वर्ष 2024-25 की तुलना में वर्ष 2025-26 में 9% की वृद्धि हुई है। इसी दौरान प्रति व्यक्ति आय 1 लाख 69 हज़ार रही। हमारा लक्ष्य है कि वर्ष 2047 तक प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 22 लाख 35 से अधिक हो। वर्ष 2046-47 तक म.प्र. की अर्थव्यवस्था 250 लाख करोड तक पहुंचाने के लिए विकसित मध्यप्रदेश 2047 के रोडमैप पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान। राज्य का बजट अगले पांच वर्षों में दोगुना किया जाएगा। रोलिंग बजट प्रस्तुत करने वाला संभवतः मध्यप्रदेश, देश का पहला राज्य है। राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम का पालन करने में देश में अग्रणी है। हमारे राज्य की वित्तीय स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। वर्ष 2021-22 में राजस्व प्राप्तियाँ राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 15.90 प्रतिशत थीं, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 17.16 प्रतिशत होने का अनुमान है। राज्य के कर राजस्व में पिछले वर्ष की तुलना में 13.57 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है। राजकोषीय घाटे का पुनरीक्षित अनुमान 74 हज़ार 323 करोड़ रुपये है, जो सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 4.45 प्रतिशत है। प्रदेश के इतिहास में पहली बार अधोसंरचना विकास में बजट अनुमान 2026-27 का पूंजीगत परिव्यय रुपये 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश को पिछले एक वर्ष में विभिन्न क्षेत्रों में कुल 30 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से लगभग 9 लाख करोड़ रुपए के कार्य धरातल पर उतर चुके हैं। यह मध्यप्रदेश की बढ़ती विश्वसनीयता और औद्योगिक क्षमता का प्रमाण है। आज मध्यप्रदेश केवल एक राज्य नहीं, बल्कि अवसरों की धरती के रूप में स्थापित हो चुका है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार के सभी प्रयासों को नई गति देने के लिए हमने कुल 25 नई नीतियां लागू की हैं, जिन्होंने प्रदेश में औद्योगिक विकास के नए द्वार खोले हैं। हमने ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे स्पीड स्केल और स्किल ऑफ डूइंग बिज़नेस में परिवर्तित किया। जन विश्वास अधिनियम लागू कर 108 पुराने नियमों को समाप्त या सरल बनाकर उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया। प्रदेश में 48 औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं।

उद्यमिता और नवाचार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज देश में 6 करोड़ से अधिक एमएसएमई कार्यरत हैं। ये देश की जीडीपी में लगभग 30 प्रतिशत योगदान देते हैं और कुल निर्यात में 45 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। यदि आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ रहा है, तो उसमें लघु और सूक्ष्म उद्योगों का सबसे बड़ा योगदान है। मैं एमएसएमई को गाँव से ग्लोबल तक की विकास यात्रा का पुल मानता हूँ। स्वरोजगार हो, रोजगार सृजन हो, स्टार्टअप हो या बड़ी औद्योगिक इकाइयाँ हर स्तर पर एमएसएमई की भूमिका केंद्रीय है। इस राष्ट्रीय परिवर्तन में मध्यप्रदेश भी पीछे नहीं है। आज प्रदेश में 23 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयाँ स्थापित हैं, जो 1 करोड़ 25 लाख से अधिक रोजगार सृजित कर चुकी हैं। यह हमारी सांस्कृतिक परंपरा भी है। अहिल्याबाई होलकर ने अपने शासनकाल में बुनकरों, कारीगरों और लघु उद्योगों को संरक्षण और प्रोत्साहन दिया था। उन्होंने महेश्वर और मालवा की पहचान को हस्तशिल्प और वस्त्न उद्योग से जोड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम ‘फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैक्ट्री, फैक्ट्री टू फैशन, और फैशन टू फॉरेन’ इस पूरे वैल्यू चेन पर काम कर रहे हैं। टेक्सटाइल क्षेत्र में एमपी ग्लोबल हब बनेगा। धार में बनने वाला पीएम मित्र पार्क स्वदेशी क्रांति का शुभंकर बन रहा है। यहाँ स्पिनिंग से लेकर डिजाइन, प्रोसेसिंग और निर्यात तक पूरी वैल्यू चेन एक तैयार हो रही है।

दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदन को अवगत कराया कि हमारी सरकार ने ‘स्वावलंबी गौ-शाला नीति-2025’ लागू की और गौ-वंश के आहार की राशि को 20 रुपये से बढ़ाकर सीधे 40 रुपये कर दिया। हमारा लक्ष्य दूध संकलन को 10 लाख से बढ़ाकर 52 लाख लीटर करना और 26 हजार गांवों को डेयरी नेटवर्क से जोड़ना है। ग्वालियर में देश का पहला 100 टन का सीएनजी प्लांट और हर ब्लॉक में ‘वृंदावन ग्राम’ का निर्माण सरकार की दूरगामी सोच का परिणाम है। पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देकर हम ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांति ला रहे हैं। हम अन्नदाताओं को ऊर्जादाता भी बना रहे हैं। प्रधानमंत्री कृषिक सूर्य मित्र योजना के अंतर्गत हमने 3 हजार करोड़ रुपए की लागत से 1 लाख सोलर सिंचाई पंप किसानों को देने का लक्ष्य रखा है।

नारी कल्याण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज मध्यप्रदेश की महिलाएं केवल सहभागी नहीं, बल्कि विकास की अग्रदूत बन चुकी हैं। कौशल विकास, स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में प्रदेश के 47 प्रतिशत स्टार्टअप महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। रेडीमेड गारमेंट उद्योग में कार्यरत महिला श्रमिकों को 5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का ऐतिहासिक निर्णय हमारी सरकार ने लिया है। कार्यरत महिलाओं को सुरक्षित वातावरण देने के लिए विक्रम उद्योगपुरी, पीथमपुर, मालनपुर-घिरींगी और मंडीदीप सहित कई औद्योगिक क्षेत्रों में वर्किंग वीमेन हॉस्टल (सखी निवास) बनाए जा रहे हैं तथा अन्य जिलों में भी इन्हें स्वीकृति दी गई है। साथ ही शासकीय नौकरियों में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण देकर हमने उनके अधिकार और अवसर दोनों सुनिश्चित किए हैं।

गरीब और कमजोर वर्ग कल्याण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार का विजन स्पष्ट है सर्वसमावेशी सशक्तिकरण। विकास की पहली पंक्ति में गरीब, युवा, नारी और किसान खड़े हों, तभी वास्तविक और समावेशी विकास संभव है। गरीब, कमजोर और वंचित वर्ग का कल्याण हमारी प्राथमिकता ही नहीं, बल्कि हमारी नीति और नीयत दोनों का आधार है। हमारी सरकार जनजातीय परिवारों के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक उत्थान के लिए पूर्ण समर्पण के साथ कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘धरती आबा’ के सपने के माध्यम से जनजातीय समाज के सम्मान और विकास का जो मार्ग दिखाया, उसे हम मध्यप्रदेश की धरती पर साकार कर रहे हैं। विपक्ष ने वर्षों तक जनजातीय समाज को केवल वोट बैंक के रूप में देखा, लेकिन हमारी सरकार ने उन्हें विकास का भागीदार बनाया है। जनजातीय समाज के बच्चों और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 94 सांदीपनि विद्यालय और 63 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। आईआईटी और नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग देकर हम जनजातीय युवाओं को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर नारी शिक्षा के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण हैं। स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में भी हमने निर्णायक कदम उठाए हैं। बैगा, भारिया और सहरिया समुदाय की 2 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियानों के माध्यम से लाखों परिवारों को मूलभूत सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। वन अधिकार कानून के तहत लाखों दावों को मान्यता देकर हमने जनजातीय भाइयों को उनकी भूमि पर अधिकार दिलाया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के कल्याण के लिए भी हमारी सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। छात्रवृत्ति की आय सीमा बढ़ाकर 8 लाख रुपये करना सामाजिक न्याय के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिए प्रशिक्षण अकादमी की स्थापना उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं में समान अवसर प्रदान करेगी। हमने सामाजिक और धार्मिक सम्मान की भावना को भी सुदृढ़ किया है। जैन समाज के संरक्षण के लिए जैन कल्याण बोर्ड का गठन किया गया है और अल्पसंख्यक वर्ग की शिक्षा एवं स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। हमारी डबल इंजन सरकार की शक्ति है कि आज मध्यप्रदेश का जनजातीय, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और हर कमजोर वर्ग का परिवार सम्मान के साथ विकास की मुख्यधारा में खड़ा है। हमारा संकल्प स्पष्ट है वर्ष 2047 के विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण में हर वर्ग की समान भागीदारी सुनिश्चित करना।

खेल और युवा कल्याण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में एक नई खेल संस्कृति का विकास हुआ है। भारत विश्व की खेल शक्ति बन रहा है, हमारे खिलाड़ियों में नया आत्मविश्वास पैदा हुआ है। हमारे खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदकों की झड़ी लगाकर देश का गौरव बढ़ाया है। भारत देश अब कॉमनवेल्थ और ओलंपिक जैसे वैश्विक खेल आयोजनों की मेजबानी की दिशा में भी आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहा है। पिछले दो वर्षों में मध्यप्रदेश की खेल अकादमियों के खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 74 और राष्ट्रीय स्तर पर 438 पदक जीतकर प्रदेश और देश का नाम गौरवान्वित किया है। हमारा प्रयास है कि मध्यप्रदेश के युवा जब खेल मैदान में उतरें, तो उसे आधुनिकतम सुविधाएं, श्रेष्ठ उपकरण और सरकार का पूरा प्रोत्साहन प्राप्त हो। प्रदेश की प्रतिभा की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है। शहडोल जिले के विचारपुर गांव के फुटबॉल खिलाड़ियों की प्रतिभा को वैश्विक मंच देने के लिए हमारी सरकार ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में सक्रिय सहयोग प्रदान किया है। हम मध्यप्रदेश को केवल खिलाड़ियों का गढ़ ही नहीं, बल्कि खेल पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में भी तेजी से कार्य कर रहे हैं।

रोजगार सृजन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि प्रदेश के युवाओं, श्रमिकों और हर वर्ग को अधिक से अधिक रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य क्षेत्र में लोक स्वास्थ्य संवर्ग के अंतर्गत 3 हजार 850 नवीन पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। नर्सिंग ऑफिसर्स, लैब तकनीशियन और रेडियोग्राफर जैसे पदों पर भी चरणबद्ध भर्ती सुनिश्चित की जा रही है। विशेष भर्ती अभियान के माध्यम से लगभग 2 हजार 589 दिव्यांगजनों को विभिन्न विभागों में नियुक्ति प्रदान कर उन्हें सम्मानजनक जीवन से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में प्राप्त 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्रदेश के युवाओं के लिए नए अवसरों का द्वार खोल रहे हैं, जिससे हजारों रोजगार सृजित हो रहे हैं और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश से भी रोजगार के नए आयाम स्थापित होंगे। प्रदेश की 23 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयाँ पहले ही करोड़ों लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। युवाओं को कौशल से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना के माध्यम से प्रशिक्षण के साथ भत्ता दिया जा रहा है, रोजगार मेलों और करियर मार्गदर्शन योजनाओं के माध्यम से युवाओं को निजी क्षेत्र में अवसर मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले 3 वर्षों में 2 लाख से अधिक शासकीय नियुक्तियों का हमारा अटूट संकल्प है।

शैक्षणिक विकास

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने वाला मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बना। नई शिक्षा नीति ने प्रदेश में वास्तविक क्रांति लाई है। किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर कौशल, नवाचार और रोजगार आधारित शिक्षा को प्राथमिकता दी गई है। सांदीपनी विद्यालय, पीएम श्री स्कूल और पीएम कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस के रूप में प्रदेश में शिक्षा की त्रिवेणी बन रही है। अभी 369 सांदीपनी विद्यालय आधुनिक संसाधनों से संचालित हो रहे हैं, 700 से अधिक विद्यालय पीएम श्री के रूप में विकसित किए गए हैं। कक्षाएं स्मार्ट हो रही हैं, प्रयोगशालाएं बन रही हैं, डिजिटल पोर्टल 3.0 से पूरी व्यवस्था पारदर्शी हुई है। करीब 55 लाख बच्चों को गणवेश की राशि, बच्चों को साइकिलें, छात्रवृत्तियाँ, लैपटॉप, स्कूटी यह केवल सहायता नहीं, बच्चों और मध्यप्रदेश के उज्ज्वल भविष्य में एफडी है। पिछले वर्ष हाईस्कूल का परिणाम 76.22 प्रतिशत और हायर सेकेंडरी का 74.48 प्रतिशत रहा। जो पिछले 15 वर्षों का सर्वश्रेष्ठ है।

विकसित और आत्मनिर्भर भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च को भविष्य का सबसे बड़ा निवेश मानकर काम कर रहे हैं। अधोसंरचना विकास की विभिन्न परियोजनाएं मध्यप्रदेश तकदीर और तस्वीर दोनों बदल रही हैं। प्रदेश में सड़क, रेल और हवाई नेटवर्क का विस्तार कर हम यातायात को सुगम बना रहे हैं, जिससे समृद्धि और विकास की नई संभावनाओं के द्वार खुल रहे हैं। अधोसंरचना विकास के लिए बजट में पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया है। अधोसंरचना विकास को नई गति देते हुए, शहरी विकास की दृष्टि से नगरीय निकायों में विकास कार्यों हेतु नवीन ‘द्वारका योजना’ प्रारंभ की जा रही है। अगले 3 वर्षों के लिए 5000 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। प्रदेश में हाइस्पीड कॉरिडोर, फोर लेन, सिक्सलेन हाइवे, एलिवेटेड कॉरिडोर, ओवरब्रिज और टनल निर्माण ने देश के परिवहन क्षेत्र को नई ऊंचाई दी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आम जनता के लिए सुगम, सुरक्षित और किफायती लोक परिवहन व्यवस्था लागू की जा रही है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत नगर और ग्रामीण मार्गों पर आवश्यकता अनुसार बसों की संख्या और आवृत्ति तय कर सुविधाजनक यात्री बस सेवा चलाई जाएगी। प्रदेश में विमान सेवाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। रीवा, सतना और दतिया में नए एयरपोर्ट शुरू हुए हैं। बीते वर्ष में विमानतलों की संख्या 5 से बढ़कर 8 हुई है और शिवपुरी के लिए अनुबंध हो चुका है। लक्ष्य है कि हर 200 किमी पर एक हवाई अड्डा और हर 150 किमी पर एक हवाई पट्टी हो, ताकि सुदूर अंचलों तक हवाई पहुंच संभव हो। धार्मिक और पर्यटक स्थलों को जोड़ने के लिए पीएम श्री धार्मिक पर्यटन हेली सेवा संचालित की जा रही है।

ऊर्जा क्षेत्र में विकास

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के विजन और हमारी सरकार की नीतियों से मध्य प्रदेश एक ‘पावर सरप्लस स्टेट’ बन चुका है। हमने न केवल गैर-कृषि उपभोक्ताओं को 24 घंटे निर्बाध बिजली दी, बल्कि रबी सीजन में लगभग 20 हजार मेगावाट की रिकॉर्ड मांग को सफलतापूर्वक पूरा करके दिखाया है। नवीन ऊर्जा के क्षेत्र में हमने बीते 12 वर्षों में 20 गुना की ऐतिहासिक वृद्धि की है। हमने सांची को देश की पहली सोलर सिटी बनाया और ओंकारेश्वर में दुनिया की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर परियोजना खड़ी कर दी। आज हम नीमच में 2.15 रुपये जैसी न्यूनतम दर पर बिजली दे रहे हैं, जो हमारी कुशल नीति का प्रमाण है। आज हम सौर ऊर्जा के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) और पंप स्टोरेज में 88 हजार करोड़ रुपये का निवेश लाकर मध्य प्रदेश को देश का ‘ग्रीन एनर्जी हब’ बना रहे हैं। प्रदेश को भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए तैयार करने और निजी निवेश के लिए TBCB मॉडल पर हम कार्य करेंगे। ऊर्जा क्षेत्र में 70,000 करोड़ के नए निवेश और 4000 मेगावाट की नई परियोजनाओं से हम मध्य प्रदेश को उद्योगों के लिए ‘पावर हब’ बनाएंगे।

सायबर तहसील

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजस्व सेवाओं में हमने डिजिटल क्रांति का नया अध्याय लिखा है। सुशासन की दिशा में अभूतपूर्व कदम बढ़ाते हुए हाल ही में देश के पहले सायबर पंजीयन कार्यालय का शुभारंभ किया गया है। साइबर पंजीयन के अंतर्गत 75 से अधिक सेवाओं शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बना है जहाँ सभी 55 जिलों में साइबर तहसील व्यवस्था लागू की गई है। यह केवल नवाचार नहीं, बल्कि प्रशासनिक परिवर्तन का प्रतीक है, जिसके लिए प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री पुरस्कार से सम्मानित किया 39 गया है। ‘साइबर तहसील 2.0’ के माध्यम से मात्र 25 दिनों में कार्य पूर्ण हो रहा है और आदेश की प्रति सीधे WhatsApp पर प्राप्त हो रही है।

सुशासन की नई पहल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में टेक ग्रोथ समिट, स्टार्टअप समिट और रीजनल इंडस्ट्री कॉनक्लेव और ग्लोबल इन्वेस्टर्स कॉनक्लेव के माध्यम से एआई के क्षेत्र में नए अवसर और निवेश आ रहे हैं। हमारी सरकार ने प्रदेश में ई-कैबिनेट शुरू की है। यह ई-गवर्नेस व्यवस्था को विस्तार करने की दिशा में सार्थक पहल है। हमने ईज़ ऑफ डूइंग को केवल काराज़ों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जमीन पर उतारते हुए उसे स्पीड, स्केल और स्किल ऑफ़ डूइंग में परिवर्तित कर दिया।

पर्यटन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि के बाद पर्यटन मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। प्रदेश की प्राकृतिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के कारण पिछले वर्ष 13 करोड़ से अधिक पर्यटक प्रदेश आए, जो हमारी वैश्विक पहचान और आर्थिक समृद्धि का प्रमाण है। विभाग के बजट में 47.4 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। पर्यटन विभाग के लिए 2026-27 में 566 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। पर्यटन नीति 2025, फिल्म पर्यटन नीति-2025 हमने लागू की है। यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि केंद्र की “वैश्विक गंतव्य योजना” में हमारी विश्व धरोहर खजुराहो को शामिल किया गया है। प्रदेश में पर्यटन को सुदृढ़ बनाने के लिए पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा के माध्यम से प्रमुख शहरों को हवाई संपर्क से जोड़ा गया है। साथ ही धार्मिक पर्यटन हेली सेवा और राष्ट्रीय उद्यानों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार कर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सुगम यात्रा सुनिश्चित की गई है।

सिंहस्थ की तैयारी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा‍ कि सिंहस्थ के चलते उज्जैन का अभूतपूर्व कायाकल्प हो रहा है। महाकाल लोक के निर्माण ने जहां उज्जैन को वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन का केन्द्र बनाया है, वहीं अब सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए अनेक विकास परियोजनाओं पर कार्य इस पुण्य नगरी में हो रहा है। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ 2028 की तैयारियाँ युद्ध स्तर पर जारी हैं। यह आयोजन हमारी सनातन परंपरा, सांस्कृतिक शक्ति और वैश्विक आध्यात्मिक नेतृत्व का विराट प्रतीक बनने जा रहा है। सिंहस्थ को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में इसे यूनेस्को की सूची में शामिल किए जाने का गौरव भी प्राप्त हुआ है। इस महाआयोजन के लिए 13 हजार 851 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। वर्ष 2026-27 के बजट में सिंहस्थ के लिए 3 हजार 60 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है।

आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लिए तैयार होता मध्यप्रदेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम लोकल से ग्लोबल की यात्रा पर हैं। प्रधानमंत्री मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ के स्वप्न को साकार करने में ‘मेक इन मध्यप्रदेश’ बड़ी भूमिका निभाएगा। प्रदेश आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पिछले वर्ष भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड का भूमिपूजन किया गया है, प्रदेश में अब मेट्रो कोच, वंदे भारत रोलिंग स्टॉक, इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट्स का निर्माण होगा। धार में देश के पहले टेक्सटाइल पार्क का भूमिपूजन किया गया है, धार में बनने वाला पीएम मित्र पार्क स्वदेशी क्रांति का शुभंकर बनेगा। प्रदेश में विगत दशकों में डिफेन्स और एयरोस्पेस का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है। जबलपुर में स्थित ऑर्डनन्स फैक्ट्री, व्हीकल फैक्ट्री, ग्रे आयरन फॉउंडरी एवं गन कैरेज फैक्ट्री से देश की सेना को उपकरणों की सहायता प्रदान की जा रही है। विकसित भारत- 2047 में मध्यप्रदेश की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। हमारी सरकार ने मध्यप्रदेश को 2 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सभी क्षेत्रों के लिए 25 वर्षों का दृष्टिपत्र तैयार किया गया है। हम प्रति व्यक्ति आय को 22 लाख रुपये तक ले जाने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। ‘कृषक कल्याण वर्ष’ में हमारा लक्ष्य तकनीक और ब्रांडिंग के जरिए मध्य प्रदेश को देश का ‘Agri Value Hub’ बनाना और खेत से बाजार की दूरी मिटाना है। अगले 5 वर्षों में दूध संकलन 52 लाख लीटर तक पहुंचाकर और 50 प्रतिशत गांवों में समितियाँ गठित कर हम मध्यप्रदेश को देश की ‘डेयरी कैपिटल’ बनाएंगे।

कमजोर और वंचित वर्ग के विकास का संकल्प है हमारा बजट

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बजट साढ़े 8 करोड़ प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। गरीबों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने, युवाओं को शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसर प्रदान करने, नारी शक्ति को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने तथा किसानों को समृद्धि की राह पर आगे बढ़ाने का व्यापक दृष्टिकोण बजट में दिखाई देता है। कमजोर और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा में लाने का संकल्प भी इस परिलक्षित होता है। यह सरकार की वही सोच है जिसमें अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को प्रथम पंक्ति में लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि अधोसंरचना विकास, निवेश और रोजगार सृजन, उद्योग एवं ग्रामोद्योग के विस्तार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, जल और ऊर्जा संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन संवर्धन और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का व्यापक रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। हमारा लक्ष्य एक समृद्ध सशक्त और सर्वसमावेशी मध्यप्रदेश का निर्माण है, जो विकसित भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदन को राज्य सरकार की ताजा उपलब्धियों और विभिन्न नवाचारों की भी जानकारी दी।

You May Like