
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा ने कहा कि एक सशक्त न्यायिक प्रणाली के लिए केवल विधिक विशेषज्ञता ही नहीं, बल्कि आधुनिक और सुलभ अवसंरचना भी आवश्यक है। वे न्यायालय भवनों के ई-लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि विभिन्न जिलों में नए न्यायालय भवनों, मध्यस्थता केंद्रों व आवासीय सुविधाओं का उद्घाटन विशेष रूप से जिला एवं तहसील स्तर पर न्याय तक पहुंच को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। शहडोल और बक्सवाहा में नए न्यायालय परिसर न्यायिक कार्यप्रणाली की दक्षता को बढ़ाएंगे व इनमें संवेदनशील वर्गों के लिए बालमैत्री सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। विभिन्न जिलों में स्थापित किए जा रहे मध्यस्थता केन्द्र विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान को बढ़ावा देंगे और नियमित न्यायालयों पर भार कम करने में सहायक होंगे। समग्र रूप सेए उद्देश्य एक ऐसी न्याय प्रणाली का निर्माण करना है जो दक्षए संवेदनशील और समावेशी हो व जिससे जनसामान्य का विश्वास सुदृढ़ हो। इन आधुनिक और सुसज्जित न्यायालय भवनों की स्थापना से न्यायिक प्रक्रिया की क्षमता और गतिशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी व वादकारियों के लिए न्याय तक पहुंच और अधिक सुलभ बनेगी। उन्होंने मध्यस्थता केंद्रों के महत्व पर बल देते हुए कहा कि ये केंद्र विवादों के सौहार्दपूर्ण, त्वरित और किफायती समाधान के लिए शांतिपूर्ण और अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं। उन्होंने उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीशों, जिला न्यायपालिका के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों तथा निर्माण कार्य में संलग्न सभी अधिकारियों को उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए बधाई दी।
इन भवनों का हुआ लोकार्पण-
जिला न्यायालय भवन शहडोल, सिविल न्यायालय भवन बक्सवाहा (छतरपुर), नैनपुर (मंडला), सनावद व बड़वाहा (मंडलेश्वर), अजयगढ़ व पवई (पन्ना), कोलारस व खनियाधाना (शिवपुरी), सिरोंज एवं लटेरी (विदिशा) में नवनिर्मित मध्यस्थता केन्द्र तथा बालाघाट, पवई (पन्ना) व सारंगपुर (राजगढ़) में न्यायिक अधिकारियों के नवीन आवासीय परिसरों का ई-लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर प्रशासनिक न्यायमूर्ति विवेक रूसिया, संबंधित जिलों के माननीय पोर्टफोलियो न्यायाधीशगण व हाईकोर्ट की प्रधान पीठ जबलपुर व खंडपीठ इंदौर और ग्वालियर के न्यायाधीशगण की गरिमामयी उपस्थिति रही।
