विश्व विरासत दिवस के उपलक्ष्य में 17-22 अप्रैल तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करेगा आईआईएच

नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (वार्ता) भारतीय विरासत संस्थान (आईआईएच) मानव विरासत के संरक्षण के वैश्विक उद्देश्य को सुदृढ़ करने के लिए विश्व विरासत दिवस के उपलक्ष्य में 17 से 22 अप्रैल तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। आईआईएच की ओर से शुक्रवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार विश्व विरासत दिवस के उपलक्ष्य में तीन प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें दो विशेष व्याख्यान, वस्त्रों पर कार्यशालाओं की शृंखला तथा एक ऑनलाइन व्याख्यान शृंखला शामिल है।
आईआईएच के अनुसार 18 अप्रैल को प्रातः 11 बजे विश्व प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना डॉ. शोभना नारायण संस्थान के सभागार में ‘कथक – गति में विरासत : समय और परंपरा की कथाएं’ विषय पर विशेष व्याख्यान देंगी।
इसके पश्चात भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. संजय कुमार मंजुल ‘सिंधु–सरस्वती संस्कृति के नवीन साक्ष्य : राखीगढ़ी में उत्खनन’ विषय पर व्याख्यान देंगे।

आईआईएच ने बताया है कि प्रथम चरण में 17 अप्रैल, को भारत की वस्त्र विरासत के तकनीकी पहलुओं तथा उनसे जुड़ी कथाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके साथ ही, भारतीय विरासत संस्थान के नोएडा परिसर में संग्रहालय विज्ञान विभाग द्वारा वंचित समुदायों के लिए कार्यशालाओं की एक शृंखला आयोजित की गयी। इसी शृंखला में, 22 अप्रैल को राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय एवं हस्तकला अकादमी में संग्रहालय विज्ञान विभाग द्वारा वंचित समुदायों के लिए कार्यशालाओं की एक शृंखला आयोजित की जाएगी। ‘फ्रॉम कलेक्शन टू म्यूज़ियम : आवर टेक्सटाइल्स, आवर स्टोरीज़’ शीर्षक से आयोजित यह पहल सांस्कृतिक संस्थानों और समाज के वंचित वर्गों के बीच की दूरी को कम करने का प्रयास है, जिनमें से अनेक लोगों को कभी संग्रहालय देखने का अवसर नहीं मिला है।

आईआईएच ने कहा है कि भारत की वस्त्र विरासत देश की सांस्कृतिक पहचान का एक अत्यंत सजीव और महत्वपूर्ण अंग है। इन कार्यशालाओं का उद्देश्य संग्रहालय के अनुभव को एक दूरस्थ अवधारणा से बदलकर एक व्यक्तिगत कथा में परिवर्तित करना है। किसी वस्तु की यात्रा – एक घरेलू उपयोग की वस्तु से संग्रहालय में संरक्षित धरोहर बनने तक – पर केंद्रित यह कार्यक्रम प्रतिभागियों को स्वयं की इतिहास-परम्परा को राष्ट्रीय विरासत में प्रतिबिम्बित करने के लिए प्रेरित करता है। यह कार्यशाला शृंखला दो प्रमुख स्थानों पर आयोजित की जाएगी, जिससे प्रतिभागियों को एक व्यापक और समग्र शैक्षणिक अनुभव प्राप्त हो सके।

आईआईएच के अनुसार आयोजन के द्वितीय चरण में 22 अप्रैल को प्रतिभागियों को शिल्प गुरुओं तथा ऐतिहासिक प्रदर्शनियों के साथ प्रत्यक्ष रूप से जुड़ने का अवसर प्राप्त होगा। इन कार्यशालाओं का मूल उद्देश्य समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना है। विविध एवं वंचित वर्गों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से भारतीय विरासत संस्थान ऐसे नवीन शैक्षणिक संसाधनों के निर्माण का प्रयास कर रहना है जो संग्रहालयों की भूमिका को सरल एवं स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करें। आईआईएच “प्रतिभागी यह सीखेंगे कि संग्रहालय किस प्रकार हमारी पहचान के संरक्षक के रूप में कार्य करते हैं तथा यह सुनिश्चित करते हैं कि ‘वस्त्रों’ के पीछे की ‘कथाएं’ समय के साथ कभी विलुप्त न हों।”

आईआईएच ने कहा है कि पुरालेख, पुरालिपि एवं मुद्राशास्त्र विभाग, ‘भारतीय विरासत संस्थान द्वारा विरासत संवाद’ शीर्षक से एक ऑनलाइन व्याख्यान शृंखला भी आयोजित कर रहा है। इस शृंखला का प्रथम व्याख्यान 18 अप्रैल को सांय चार बजे से आयोजित होगा। यह व्याख्यान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अभिलेख शाखा के पूर्व निदेशक डॉ. टी. एस. रविशंकर द्वारा दिया जाएगा। गौरतलब है कि 18 अप्रैल को विश्व विरासत दिवस के तौर पर मनाया जाता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 1982 में अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल परिषद् (आइकॉमस) द्वारा प्रस्तावित किया गया था तथा वर्ष 1983 में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) द्वारा आधिकारिक रूप से अपनाया गया। तब से यह दिवस प्रत्येक वर्ष विश्वभर में मनाया जा रहा है, जिससे मानव विरासत के संरक्षण की आवश्यकता को बल मिला है तथा इस दिशा में निरंतर कार्य करने वाले व्यक्तियों के प्रयासों को मान्यता दी गई है।

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