नयी दिल्ली | लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर ऐतिहासिक वोटिंग से ठीक पहले केंद्र सरकार ने एक बड़ा कूटनीतिक दांव चला है। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने गुरुवार देर रात अधिसूचना जारी कर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023’ (106वां संविधान संशोधन) को तत्काल प्रभाव से 16 अप्रैल, 2026 से लागू कर दिया है। यह कदम तब उठाया गया जब संसद में पहले से ही इस कानून में सुधार कर इसे 2029 से लागू करने के लिए नए संशोधनों पर बहस चल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिसूचना जारी होने के बाद अब यह कानून कागजों पर औपचारिक रूप से प्रभावी हो चुका है, जिससे सरकार ने एक मजबूत कानूनी आधार तैयार कर लिया है।
संसद में चर्चा के दौरान ‘रूल 66’ (लोकसभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियम) चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सरकार ने इस नियम के तहत तीन अलग-अलग विधेयकों—केंद्र शासित प्रदेशों में आरक्षण, 131वां संविधान संशोधन और परिसीमन विधेयक—को एक साथ जोड़कर पेश किया है। इसका तकनीकी अर्थ यह है कि अब सांसदों को इन तीनों पर अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साथ वोट देना होगा। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने यह जाल इसलिए बुना है क्योंकि उसके पास संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत (करीब 360 वोट) की कमी है। रूल 66 के इस्तेमाल से सरकार ने विपक्ष को ‘समर्थन या पूर्ण विरोध’ की स्थिति में खड़ा कर दिया है।
कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम को “बैकअप प्लान” करार दिया है। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि सरकार को डर है कि नया संशोधन विधेयक गिर सकता है, इसलिए उन्होंने पुराने कानून को रातों-रात अधिसूचित कर दिया ताकि श्रेय बना रहे। लोकसभा में वर्तमान संख्या बल को देखते हुए एनडीए के लिए 360 का जादुई आंकड़ा पार करना एक बड़ी चुनौती है। विपक्षी सांसदों ने इसे संघीय ढांचे के साथ खिलवाड़ बताते हुए कहा है कि परिसीमन को महिला आरक्षण के साथ जोड़ना दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कम करने की साजिश है। अब सबकी नजरें आज शाम होने वाली वोटिंग पर टिकी हैं।

