प्रधानमंत्री ने चंद्र शेखर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की, उनके आदर्शों के प्रति नए सिरे से प्रतिबद्धता का किया आह्वान

नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री चंद्र शेखर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की, जो उनके शताब्दी वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने नागरिकों, विशेषकर युवाओं से, उनके जीवन और आदर्शों से प्रेरणा लेने का आग्रह किया।

श्री मोदी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में चंद्र शेखर को “साहस, दृढ़ विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता से परिपूर्ण जन नेता” बताया और कहा कि यह अवसर उनके आदर्शों के अनुरूप “समृद्ध और न्यायपूर्ण भारत” के निर्माण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को दोहराने का अवसर है। प्रधानमंत्री ने कहा, “इस वर्ष उनकी 100वीं जयंती की शुरुआत है और यह उनके समृद्ध और न्यायपूर्ण भारत के आदर्शों को साकार करने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने का समय है।”

दिवंगत नेता के जनप्रिय जुड़ाव को याद करते हुए मोदी ने कहा कि चंद्र शेखर “भारत की मिट्टी से दृढ़ता से जुड़े रहे और आम नागरिकों की आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील थे।” उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सरलता और स्पष्टता लाई। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री के साथ अपनी व्यक्तिगत मुलाकातों को याद करते हुए कहा, “मुझे वे क्षण याद हैं जब मुझे उनसे मिलने और राष्ट्र के विकास के लिए विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर मिला।”

युवा पीढ़ी से देश की राजनीतिक विरासत से गहराई से जुड़ने का आह्वान करते हुए श्री मोदी ने उनसे चंद्र शेखर के विचारों और योगदानों का अध्ययन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “मैं भारत के युवाओं से उनके विचारों और भारत की प्रगति के लिए किए गए प्रयासों के बारे में अधिक पढ़ने का आह्वान करता हूं।”

चंद्र शेखर, जिन्होंने भारतीय राजनीति के उथल-पुथल भरे दौर में नवंबर 1990 से जून 1991 तक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया, अपनी स्वतंत्र सोच और जमीनी स्तर से जुड़ाव के लिए जाने जाते थे।

अपने प्रारंभिक राजनीतिक जीवन में अक्सर उन्हें “युवा तुर्क” कहा जाता था। वे एक प्रमुख समाजवादी नेता के रूप में उभरे और अपने बेबाक विचारों और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी विरासत को सभी राजनीतिक दलों के बीच आज भी याद किया जाता है, विशेष रूप से सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी पर उनके जोर और ग्रामीण भारत की चिंताओं को उजागर करने के उनके प्रयासों के लिए।

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