डॉक्टरों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, लाइसेंस निलंबित करने का आदेश निरस्त

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के उस आदेश को निरस्त कर दिया जिसके तहत डॉक्टरों का लाइसेंस छह माह के लिए निलंबित कर दिया था। जस्टिस दीपक खोत की एकलपीठ ने कहा कि एमसीआई ने रिकॉर्ड पर रखे गए दस्तावेजों का उचित मूल्यांकन किए बिना विवेकहीन तरीके से आदेश पारित किया। कार्रवाई करते समय एमसीआई ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं किया, इसलिए उक्त आदेश अवैधानिक है।

यह मामला जबलपुर निवासी डॉ. हर्ष सक्सेना, डॉ. आलोक अग्रवाल सहित अन्य की ओर से दायर किया गया था। जिनकी ओर से अधिवक्ता सुमित रघुवंशी ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि 18 फरवरी 2025 को एमसीआई की आचार समिति के निर्देश पर मप्र मेडिकल काउंसिल भोपाल ने कदाचरण के आरोप में याचिकाकर्ता चिकित्सकों का लायसेंस छह माह के लिए निलंबित कर दिया था। दरअसल, मई 2012 में न्यूरोसर्जन डॉक्टर्स की एक टीम पर्यटन के लिए लंदन गई थी। समाजसेवी संस्था स्वास्थ्य अधिकार मंच ने मेडिकल काउंसिल में शिकायत कर आरोप लगाया कि उक्त टीम को एक निजी फार्मा कंपनी ने प्रायोजित किया है। दलील दी गई कि डॉक्टर्स ने स्वयं अपनी जेब से टूर का पूरा खर्चा दिया है। प्रमाण स्वरूप बैंक चेक और अन्य ट्रांजेक्शन भी पेश किए गए, इसके बावजूद उक्त कार्रवाई की गई। सुनवाई के बाद न्यायालय ने कहा कि एमसीआई के आदेश में कई अनियमितताएँ हैं और विधि की दृष्टि से मान्य नहीं है, इसलिए इसे निरस्त किया जाना उचित है।

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