व्यापार घाटा मार्च में घटकर 20.67 अरब डॉलर, अमेरिका को निर्यात में तेजी

नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (वार्ता) वैश्विक बाजार की अनिश्चतताओं के बीच मार्च महीने में भारतीय निर्यात क्षेत्र के जीवट भरे प्रदर्शन के चलते देश का व्यापार घाटा घटकर 20.67 अरब डॉलर तक सीमित रहा।

वाणिज्य मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले नौ माह में माल के निर्यात-आयात मूल्य के अंतर को प्रदर्शित करने वाले इस घाटे का यह न्यूनतम स्तर है। आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष मार्च में वाणिज्यक वस्तुओं का निर्यात मासिक आधार पर बढ़कर 38.92 अरब डॉलर रहा जो पिछले महीने 36.61 अरब डॉलर था। वहीं आयात घटकर 59.59 अरब डॉलर रह गया, जो फरवरी में 63.71 अरब डॉलर था।

व्यापार घाटे में यह कमी मुख्यतः अमेरिका को निर्यात में तेज़ वृद्धि के कारण है। पश्चिम एशिया में ईरान की लड़ाई से प्रभावित व्यापारिक व्यवधानों और ईंधन के दामों में वृद्धि के बीच अमेरिकी बाजार में निर्यात में तेजी से व्यापार को कुछ संतुलित रखने में मदद मिली1 मार्च में अमेरिका को निर्यात फरवरी की तुलना में 17.4 प्रतिशत बढ़ कर 8.02 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वहां आयात शुल्क घटाकर 10 प्रतिशत हो गया है जिससे वहां के बाजार में वस्त्र और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिला। इससे पहले अमेरिका में भारत के ऐसे कई उत्पादों पर शुल्क 50 प्रतिशत तक कर दिया गया था जिससे निर्यात की संभावनाएं प्रभावित हुई थीं । फरवरी के अंत से पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने के बाद से व्यापारिक माल की ढुलाई और जहाजी बीमा आदि की लागतें प्रभावित हुई हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025–26 में भारत का कुल निर्यात (माल और सेवा मिला कर) 2024–25 के 825.26 अरब डॉलर की तुलना में 4.22 प्रतिशत बढ़कर 860.09 अरब डॉलर हो गया1 इसी अवधि में आयात 6.47 प्रतिशत की अपेक्षाकृत तेज़ दर से बढ़कर 919.92 अरब डॉलर की तुलना में लगभग 970 अरब डॉलर रहा।

इसके परिणामस्वरूप, माल और सेवाओं सहित कुल व्यापार घाटा 2025–26 में बढ़कर 119.30 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 94.66 अरब डॉलर था। वर्ष 2025-26 के दौरान माल निर्यात में 0.93 प्रतिशत की मामूली वृद्धि हुई और यह 441.78 अरब डॉलर तक पहुंचा, जो एक साल पहले 437.70 अरब डॉलर था। वहीं माल का आयात अधिक तेजी से बढ़कर 774.98 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 721.20 अरब डॉलर था।

सेवा क्षेत्र के निर्यात के प्रदर्शन में मजबूती जारी रही और सेवाओं का वार्षिक निर्यात अनुमानित 387.55 अरब डॉलर से बढ़कर 418.31 अरब डॉलर हो गया1 वर्ष के दौरान सेवाओं का आयात भी 198.72 अरब डॉलर से बढ़कर 204.42 अरब डॉलर रहा।

आंकड़ों के अनुसार पेट्रोलियम और रत्न-आभूषण को छोड़कर, भारत की व्यापार स्थिति लगभग संतुलित रही। इस श्रेणी में वार्षिक निर्यात 732.05 अरब डॉलर से बढ़कर 777.98 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 653.31 अरब डॉलर से बढ़कर 702.98 अरब डॉलर हो गया। इस खंड में व्यापार अधिशेष थोड़ा घटकर 75.00 अरब डॉलर रह गया, जो पहले 78.74 अरब डॉलर था।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (फियो) ने वित्त वर्ष 2025–26 में भारत के ज़बरदस्त विदेश व्यापार प्रदर्शन का स्वागत किया है और इसे मजबूत घरेलू गतिविधियों का संकेत बताया है।

फियो के अध्यक्ष एस. सी. रल्हन ने कहा: “खासकर वैश्विक अनिश्चितताओं, सप्लाई चेन में रुकावटों और माँग में उतार-चढ़ाव के बीच निर्यात में 860 अरब डॉलर का आँकड़ा पार करना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है । यह भारतीय निर्यातकों की अनुकूलन क्षमता और ताक़त को उजागर करता है।”उन्होंने बताया कि निर्यात में बढ़ोतरी की वजह एक विविध बास्केट थी, जिसमें इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाएँ, रसायन, कपड़ा, रत्न और आभूषण, चावल और समुद्री उत्पाद शामिल थे, जिससे वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति और मज़बूत हुई है।

फियो अध्यक्ष ने कहा कि अमेरिका, यूएई, चीन, नीदरलैंड और ब्रिटेन निर्यात के मुख्य गंतव्य बने हुए हैं। फियो ने बाज़ारों में और विविधता लाने और भारत की वैश्विक पहुँच का विस्तार करने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों का प्रभावी ढंग से लाभ उठाने की ज़रूरत पर बल दिया।

श्री रल्हन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार, लेन-देन की लागत में कमी और विशेष रूप से एमएसएमई के लिए सस्ती ऋण सुविधा सुनिश्चित करना निर्यात की गति को बनाए रखने के लिए बेहद ज़रूरी होगा।

उन्होंने कहा, “लगातार नीतिगत समर्थन और व्यापार सुविधा के साथ, भारत वैश्विक व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और ‘विकसित भारत’ के विज़न के तहत एक अग्रणी निर्यात महाशक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।”

इंजीनियरिंग निर्यात के प्रोत्साहन से जुड़े संगठन ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष पंकज चड्ढा ने कहा कि 2025–26 में कई बाहरी चुनौतियों के बावजूद इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात 122.43 अरब “डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। यह पिछले वित्त वर्ष के 116.75 अरब अमेरिकी डॉलर की तुलना में 4.86 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि मार्च 2026 में पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वहां का प्रमुख समुद्री मार्गबाधित हुआ इसके बावजूद देश के इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यात में 1.1 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की गई। मार्च में कुल इंजीनियरिंग निर्यात 10.94 अरब डॉलर रहा जो एक साल पहले इसी माह 10.82 अरब डॉलर था। श्री चढ्ढा ने कहा, ‘यह वृद्धि दर्शाती है कि भारतीय इंजीनियरिंग क्षेत्र में मजबूती है और वह नई परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में सक्षम है। यह वैश्विक बाजार में इंजीनियरिंग क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को भी उजागर करता है।’

पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर व्यवधान उत्पन्न हुआ है । कई तरह के कच्चे माल की कीमतों में भी वृद्धि और मुद्रास्फीति का दबाव देखा गया है।

ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष ने कहा, ‘उपरोक्त परिस्थितियों को देखते हुए, हम वित्त वर्ष 2026–27 में इंजीनियरिंग निर्यात की वृद्धि के प्रति सावधानीपूर्वक आशावादी बने हुए हैं।’

 

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