हेल्थकेयर सेक्टर में राजस्व वृद्धि के बावजूद मुनाफे में 14% की गिरावट का अनुमान: कैंसर दवा की एक्सक्लूसिविटी खत्म होने और वैश्विक तनाव से फार्मा कंपनियों पर बढ़ा दबाव

नई दिल्ली | दिग्गज ब्रोकरेज फर्म ‘सिस्टेमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज’ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही चुनौतीपूर्ण रहने वाली है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि हेल्थकेयर कंपनियों के राजस्व में करीब 12% की सम्मानजनक वृद्धि हो सकती है, लेकिन शुद्ध लाभ में 14% की भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है। इस गिरावट का सबसे प्रमुख कारण अमेरिका में कैंसर की दवा ‘रेवलिमिड’ के जेनरिक संस्करण (gRevlimid) की एक्सक्लूसिविटी का समाप्त होना है, जो अब तक भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए ऊंचे मुनाफे का एक बड़ा जरिया थी।

फार्मा कंपनियों के मार्जिन पर दबाव का दूसरा बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा भू-राजनीतिक संघर्ष है। हालांकि डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना निर्यातकों के लिए फायदेमंद होता है, लेकिन युद्ध की स्थिति के कारण लॉजिस्टिक्स और कच्चे माल (API) की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इस बढ़ती लागत ने मुद्रा विनिमय से होने वाले संभावित लाभ को पूरी तरह खत्म कर दिया है। इसके अलावा, प्रमुख दवाओं की आपूर्ति में बाधा और रॉयल्टी भुगतान जैसे कारकों ने भी कंपनियों की कार्यशील पूंजी पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।

तमाम चुनौतियों के बीच घरेलू बाजार और अस्पताल क्षेत्र से राहत की खबर है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पुरानी बीमारियों की दवाओं और नए उत्पादों की लॉन्चिंग से बाजार स्थिर बना हुआ है। अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेक्टर में 15% की वृद्धि की उम्मीद जताई गई है, जो बिस्तरों की बढ़ती संख्या और मरीजों की आवक पर आधारित है। वहीं, मेडप्लस और अपोलो हेल्थको जैसे रिटेल फार्मेसी दिग्गजों के भी शानदार प्रदर्शन की संभावना है। कुल मिलाकर, सेक्टर इस समय बदलाव के दौर से गुजर रहा है जहाँ राजस्व की मात्रा तो बढ़ रही है, लेकिन कमाई की गुणवत्ता पर दबाव बना हुआ है।

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