नयी दिल्ली, 14 अप्रैल (वार्ता) वाहन निर्माता कंपनियों के संगठन सियाम का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनजर अप्रैल में अग्नि परीक्षा होगी। सियाम के अध्यक्ष शैलेश चंद्रा ने मंगलवार को वाहनों की थोक बिक्री के आंकड़े जारी करने के बाद संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा कि मार्च में उत्पादन प्रभावित नहीं हुआ है, लेकिन अप्रैल में कंपनियां दबाव महसूस कर रही हैं और इस महीने कंपनियों की ‘अग्नि परीक्षा’ होगी। उन्होंने कहा, “ हम उम्मीद करते हैं कि युद्ध लंबा न चले यदि ऐसा होता है वाहनों की बिक्री में एकल अंक की वृद्धि के कुछ अनुमान सही साबित हो सकते हैं।” उन्होंने कहा कि फिलहाल लोग जानकारी लेने के लिए शोरूम में आ रहे हैं, लेकिन खरीदारी का फैसला लेने में देरी कर रहे हैं। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के प्रमुख श्री चंद्रा ने कहा कि अप्रैल के पहले दो सप्ताह में पश्चिम एशिया संकट का दबाव पड़ना शुरू हो गया है और उत्पादन की लागत बढ़ी है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले एल्युमीनियम की आपूर्ति पहले पश्चिम एशिया से होती थी, अब कंपनियां उसका विकल्प खोज रही हैं।
उन्होंने कहा अप्रैल में यह साफ होगा कि आपूर्ति बढ़ने की रफ्तार और पहले से मौजूद कलपुर्जों और कच्चे माल के भंडार की खपत की रफ्तार में कितना संतुलन बन पाता है। श्री चंद्रा ने कहा कि वाहन उद्योग में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले प्रोपेन और एलपीजी की कमी चिंताजनक है। कुछ चुनिंदा पेट्रो-रसायन के दाम बढ़ रहे हैं और परिवहन की लागत भी बढ़ी है। सियाम के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में वाहनों की घरेलू बिक्री 10.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2,82,65,519 इकाई के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गयी। इस दौरान यात्री वाहनों की बिक्री 7.9 प्रतिशत बढ़कर 46,43,439 इकाई पर पहुंच गयी। दुपहिया की बिक्री 10.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2,17,05,974 इकाई पर रही। श्री चंद्रा ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में सभी खंडों में रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गयी है। सात साल बाद यह स्थिति बनी है जो वाहन निर्माता कंपनियों के लिए खुशखबरी है। उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर की दरों में पिछले साल सितंबर में की गयी कटौती से ग्राहक धारणा मजबूत बनी हुई है। इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा पिछले साल रेपो दरों में की गयी कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती और सरकार द्वारा आयकर छूट की सीमा बढ़ाने से भी बिक्री बढ़ाने में मदद मिली है।

