भोपाल। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के छठे दिवस श्री विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि जब विषयों का आनंद छूटता है, तभी प्रभु भक्ति का आनंद हिलोरें मारता है। उन्होंने कहा कि विषयभोगों का सुख बच्चों की रबर निप्पल समान है, जो असली संतुष्टि नहीं देता। आत्मा से मिलने वाला सुख ही स्थायी और चिरकालिक है। मुनि श्री ने 148 कर्म प्रकृतियों की व्याख्या करते हुए कहा कि प्रभु भक्ति का आनंद आत्मा को शुद्ध करता है। रविवार को विधान समापन और जिनेन्द्र भगवान की रथयात्रा निकाली जाएगी। कार्यक्रम में मुनि संधानसागर सहित समस्त संघ उपस्थित रहा तथा शाम को शंका समाधान और समवसरण महाआरती संपन्न हुई।
