पटना | बिहार की राजनीति के लिए आज का दिन बेहद निर्णायक साबित होने वाला है, क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। राज्य के इतिहास में यह पहली बार होगा जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कोई नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेगा। इस बड़े बदलाव के लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर्यवेक्षक के रूप में पटना पहुंच रहे हैं। दोपहर 2 बजे भाजपा विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार ने स्वयं सम्राट चौधरी के नाम की सिफारिश की है, जिससे सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया और भी दिलचस्प हो गई है।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे प्रबल माना जा रहा है। कुशवाहा समुदाय से आने वाले सम्राट चौधरी के पास पिछड़ी जातियों का बड़ा समर्थन आधार है। हालांकि, भाजपा आलाकमान महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए प्राणपुर विधायक निशा सिंह के नाम पर भी विचार कर सकता है। इसके साथ ही अति पिछड़ा वर्ग से मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी और संजीव चौरसिया के नामों की भी चर्चा तेज है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि समीकरणों को साधने के लिए किसी ऐसे चेहरे को सामने लाया जा सकता है जो सामाजिक न्याय और संगठन की मजबूती, दोनों पैमानों पर खरा उतर सके।
राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी प्रबल संभावना जताई जा रही है कि भाजपा अनुसूचित जाति (SC) कार्ड खेलकर सबको चौंका सकती है। इस श्रेणी में पूर्व मंत्री जनक राम का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है, जो रविदास समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके अलावा संजय जायसवाल और दिलीप जायसवाल जैसे अनुभवी नेताओं के नाम भी संभावित सूची में शामिल हैं। फिलहाल पटना में गहमागहमी का माहौल है और सभी की नजरें शाम 4 बजे होने वाली औपचारिक घोषणा पर टिकी हैं। देखना होगा कि भाजपा नेतृत्व किसी स्थापित चेहरे पर भरोसा जताता है या फिर हरियाणा और राजस्थान की तरह किसी नए नाम के साथ नया प्रयोग करता है।

