उज्जैन: श्रद्धालुओं की सुविधा को केंद्र में रखते हुए पार्किंग से घाट तक पहुंच को पूरी तरह सहज और बाधारहित बनाने पर विशेष फोकस रखा गया है. श्रद्धालु मंदिर से लेकर घाट तक और संतों से लेकर स्नान के लिए नदी तक निर्बाध तौर पर पहुंच सके इसके मद्देनजर विशेष मार्ग प्रशस्त किए जा रहे है.नवभारत से चर्चा में सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने बताया कि इंदौर-देवास मार्ग से आने वाले वाहनों के लिए गंगेडी, धरमबड़ला, सिकंदरी, दाऊदखेड़ी, हाटकेश्वर और गोठड़ा क्षेत्रों में विकसित किए जा रहे विशाल पार्किंग स्थलों से घाटों तक सीधी, सुगम और सुरक्षित कनेक्टिविटी पर काम आगे बढ़ रहा है.
महाकाल की नगरी उज्जैन में महाकुंभ 2028 को लेकर अभूतपूर्व स्तर पर तैयारियां आकार ले रही हैं. शहर का स्वरूप तेजी से बदल रहा है,चौड़ीकरण, सौंदर्यीकरण, टू-लेन से लेकर फोर, सिक्स और आठ लेन तक सड़कों का विस्तार, एयरपोर्ट, रोप-वे, मेडिसिटी, विक्रम उद्योगपुरी और आईटी पार्क जैसे बड़े प्रकल्पों के साथ उज्जैन वैश्विक धार्मिक नगरी के रूप में उभर रहा है. उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह भी सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस नवाचार में जुटे हैं.
एक साथ 5 करोड़ श्रद्धालु
जल संसाधन विभाग द्वारा 29 किलोमीटर घाट बनाए जा रहे हैं, नदी किनारे विकसित हो रहे घाटों पर एक साथ 5 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान की व्यवस्था और पूरे महाकुंभ के दौरान लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान इस आयोजन की भव्यता को दर्शाता है.
बिना अवरोध पहुंचेंगे श्रद्धालु
श्रद्धालु बिना किसी अवरोध के पार्किंग स्थल से शिप्रा घाट, अखाड़ों और महाकाल मंदिर तक पहुंच सकें- इसी उद्देश्य के साथ मार्गों को सरल, चौड़ा और व्यवस्थित रूप दिया जा रहा है. प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान वाहनों के अत्यधिक दबाव को देखते हुए वैकल्पिक पार्किंग और रूट प्लान भी तैयार किया जा रहा है, ताकि हर स्थिति में यातायात सुचारू बना रहे.
समग्र व्यवस्था में नवाचार
महाकुंभ के दौरान 13 अखाड़ों के संत-महंतों के दर्शन, महाकाल के आशीर्वाद और मोक्षदायिनी शिप्रा में स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए समग्र व्यवस्था को नए स्वरूप में ढाला जा रहा है. लक्ष्य स्पष्ट है- हर श्रद्धालु को निर्विघ्न, सहज और आध्यात्मिक अनुभव मिले.
आदर्श धार्मिक स्थल
सिंहस्थ 2028 को विश्वस्तरीय और दिव्य बनाने के लिए परिवहन, पार्किंग और आवागमन की यह समेकित योजना उज्जैन को एक आदर्श धार्मिक आयोजन स्थल के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है
