
विन्ध्य की डायरी
डॉ रवि तिवारी
राजनीति में सत्ता और विपक्ष के नेता आमतौर पर लोगों के बीच सिक्का जमा रहे बहुत कुछ ऐसे सपने दिखा देते हैं, जिनके पूरे न होने के संकेत मात्र से जानकारों में जहां उबाल आ जाता है. वही लोगों के बीच मे किरकिरी होना शुरू हो जाती है. कुछ ऐसा ही मामला सतना मेडिकल कालेज के लिए प्रस्तावित मेडिकल हॉस्पिटल का है. जब इसकी स्वीकृति हुई तब प्रस्तावित अस्पताल को बनाने में तीन-सवा तीन सौ करोड़ के खर्च का अनुमान रखा गया था. लगभग इतनी ही राशि मेडिकल कॉलेज के निर्माण में व्यय होनी थी.गुजरात के निर्माण विशेषज्ञ को मेडिकल कालेज के निर्माण का काम दे दिया गया. बताया गया है कि कॉलेज के लिए केंद्र की बड़ी मदद कुल बजट में शामिल थी. यही वजह है कि ड्राईंग-डिजानिग से लेकर सब कुछ बाहर के लोगों के जिम्मे ही रहा. अब जब अस्पताल बनाने का अवसर आया तो डबल इंजन की सरकार ने पैसे की कमी का जिक्र किए बिना ही बजट कटौती कर नए सिरे से अस्पताल बनाने की कार्यवाही शुरू कर दी. जानकारों की बात को सही माने तो इसमें चिकित्सा शिक्षा विभाग की भूमिका संदिग्ध है. सतना में अस्पताल बनना शुरू नही हुआ इसके पहले ही रीवा की कैंसर यूनिट का काम शुरू हो गया और उसके लिए बजट का प्रावधान कर दिया गया. बताया गया है कि सतना के अस्पताल के लिए जितना बजट कम हुआ है. लगभग उतने ही खर्च में रीवा की कैंसर यूनिट बन रही है. सतना के साथ हो रहे इस अन्याय पर ठप्पा लगवाने के लिए विभाग के संचालक से अब यह कहलवा दिया गया कि यह कैंसर यूनिट का प्रावधान सिर्फ संभागीय मुख्यालयों के मेडिकल कॉलेज अस्पताल के लिए है. इस मामले में जनप्रतिनिधियों का मौन पूरे घटनाक्रम की मूक सहमति दे रहा है.
कुम्भ के बहाने पुण्य लाभ
प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में भेड़-बकरियो की तरह पिस रही देश की सनातनी जनता के बीच सौहाद्र कायम रह सके इसके लिए विन्ध्य के जनप्रतिनिधियों और प्रशासन ने अपनी ओर से कोई कोर कसर नही छोड़ी. विन्ध्य में दर्जनों स्थानों पर बनाए गए ब्लाक पाइंटों पर खाना पानी की व्यवस्था कर हैरान-परेशान धर्म प्रेमी जनता का खूब आशीर्वाद लेकर पुण्य कमाया. हालांकि शुरू में इस ओर किसी का ध्यान नहीं था. बाद में जैसे ही सोशल मीडिया के माध्यम से बात ऊपर पहुँची सभी को सिर्फ इसी व्यवस्था में मुस्तेद कर दिया गया.रीवा में उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने स्वयं आगे आकर व्यवस्था की बागडोर संभाली. अभी भी प्रशासन व्यवस्था बनाने के लिये सडक़ पर है. आस्था की गंगा में डुबकी लगाने वालो की संख्या कम नही हो रही है.
बनवाया खुद उतरे रीवा में
अंग्रेजो के जमाने मे द्वितीय विश्वयुद्ध के समय बनी तब के अंतराष्ट्रीय मापदंडों के आधार पर सतना हवाई पट्टी अब मजाक बनकर रह गई है. स्थिति यह है कि स्वंय पहल कर हवाई पट्टी को हवाई अड्डा का दर्जा दिलाने की पहल करने वाले सांसद गणेश सिंह को निजी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए चार्टर प्लेन को विवशता में रीवा में उतरवाना पड़ा. सतना की यह कमी लोगो के बीच चर्चा का विषय बन गया है.
