लक्ष्मण अवार्ड प्राप्त वूशु खिलाड़ी को राहत, अपराध दर्ज करने का आदेश निरस्त

जबलपुर। अपर सत्र न्यायाधीश संजोग सिंह बाघेला की अदालत ने प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी अरुण कुमार गोयल की अदालत द्वारा पारित आदेश को अनुचित पाकर निरस्त कर दिया है।

पुनरीक्षणकर्ता की ओर से दलील दी गई कि जबलपुर निवासी वूशु कोच मनोज गुप्ता के परिवाद में जिस पैन ड्राईव का उल्लेख किया गया है, उसमें उसकी पत्नी सारिका से तथाकथित अंतरंग संबंध के दृश्यों का होना बताया गया है। सवाल उठता है कि पुनरीक्षणकर्ता स्वयं अपने तथाकथित अंतरंग दृश्यों की फोटो वाली पैन ड्राईव परिवादी की पत्नी सारिका को देकर सार्वजनिक कैसे कर सकता है, यह बात बेहद आश्चर्यजनक है। इस तर्क से सहमत होकर अपर सत्र न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि पुनरीक्षणकर्ता के उक्त आक्षेप को देखते हुए भी जेएमएफसी कोर्ट को पुनरीक्षणकर्तागण को परिवाद में लगाए गए आक्षेपों के संबध के उसके विरूद्ध अपराध का संज्ञान लेने के पूर्व सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक था। उभय पक्ष की ओर से प्रस्तुत तर्को के आलोक में जेएमएफसी कोर्ट के समक्ष परिवाद के संबंध में गुणदोषों पर कोई टिप्पणी किया जाना उचित नहीं है, क्योकि जेएमएफसी कोर्ट द्वारा विहित वैधानिक प्रक्रिया को सम्यक रूप से नहीं अपनाया गया है। इसलिए संज्ञान दूषित होना प्रकट हुआ है। जेएमएफसी कोर्ट द्वारा पारित आदेश शुद्धता, वैधता या औचित्यता के विपरीत होने से निरस्त किए जाने योग्य है। अत: यह पुनरीक्षण याचिका स्वीकार की जाती है।

यह था मामला-

जेएमएफसी कोर्ट ने लक्ष्मण अवार्ड प्राप्त वूशु खिलाड़ी परेड कोठी इंग्लिशिया लाइन वाराणसी निवासी सिपाही सूरज यादव व उसका साथ देने वाली जबलपुर निवासी महिला कोच पर ब्लैकमेलिंग के आरोप संबंधी परिवाद की सुनवाई की थी। इसी के साथ संज्ञेय अपराध पाते हुए प्रकरण पंजीबद्ध करने का निर्देश दे दिया था। परिवादी जबलपुर निवासी वूशु कोच सारिका गुप्ता कोच के पति वूशु कोच मनोज गुप्ता की ओर से अधिवक्ता भूपेंद्र तिवारी ने पक्ष रखा था। उन्होंने दलील दी थी कि उत्तर प्रदेश पुलिस में खेल कोटे से पदस्थ लक्ष्मण अवार्ड प्राप्त वूशु खिलाड़ी सिपाही सूरज यादव ने एक शादीशुदा महिला कोच के साथ मिलकर ब्लैकमेल और एक्सटार्शन किया है। सूरज ने महिला कोच को कथित तौर पर अपने प्रेम जाल में फंसाया। इस पूरे घटनाक्रम से आहत होकर महिला के पति परिवादी वूशु कोच मनोज गुप्ता ने खेलों में नैतिकता और शुचिता बनाए रखने के उद्देश्य से खेल विभाग, भारत सरकार एवं भारतीय वूशु संघ में शिकायत कर दोनों को खेल से प्रतिबंधित करने की मांग की। इसके अलावा न्यायालयीन आदेश की प्रति मुख्यमंत्री कार्यालय उत्तर प्रदेश, प्रमुख सचिव गृह, यूपी एवं खेल संचालक उत्तर प्रदेश को सौंपते हुए मांग की गई कि सूरज को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच का संस्थित की जाए। साथ ही उप्र सरकार द्वारा दिया गया प्रतिष्ठित लक्ष्मण अवार्ड वापस लिया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि सूरज विवेचना या गवाहों को प्रभावित न कर सके।

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