
नीमच। महू रोड एवम हिंगोरिया रेलवे स्टेशन के समीप बन रहे ओवर ब्रिज निर्माण की प्लांनिंग को लेकर सेतु निगम और रेलवे विभाग के बीच 1 साल से तालमेल नहीं बैठ पा रहा है। ड्राइंग डिजाइन के अभाव में रेलवे फाटक के पास ओवर ब्रिज के पिल्लर निर्माण कार्य लंबे समय से रुका पड़ा है।रेलवे ओवर ब्रिज निर्माण की प्लानिंग को लेकर सेतु निगम व रेलवे में खिंचतान का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है जिसके चलते पिछले 1साल रेलवे फाटक के समीप कालम 11 व 12 का निर्माण कार्य बंद है। बताया जा रहा है कि इस ओवर ब्रिज के यहां की डिजाइन रेलवे विभाग देनी है। हिंगोरिया ब्रिज की लंबाई को लेकर सेतु विभाग और रेलवे विभाग में काफी लंबे समय से खिंचातान चल रही है। रेलवे विभाग 45 की जगह 65 फीट लंबाई करने पर अड़ा है।
गौरतलब है दिसम्बर 2024 को हिंगोरिया फाटक पर ओवरब्रिज का कार्य शुरु किया गया था प्रोजक्ट के मुताबिक इसमें हिंगोरिया में 900 मीटर 33 करोड़ की लागत से ओवर ब्रिज बनाया जाना है। ओवर ब्रिज का 80 फीसदी कार्य पूर्ण हो चुका है। लेकिन 20 फीसदी कार्य चीताखेड़ा से रेलवे फाटक तक के बीच की ड्राईग डिजाइन रेलवे विभाग द्वारा नहीं दिए जाने के कारण ओवर ब्रिज का कार्य गति नहीं पकड़ पा रहा है। वहीं इस मामले में रेलवे विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का कहना उन्हें डिजाइन मुख्यालय को भेज दी है। गौरतलब है पहले जनरल असेसमेंट ड्राइंग में रेलवे क्षेत्र में फाटक के सेंटर से करीब 45 फीट लंबाई तय थी। रेलवे 45 फीट की जगह 65 फीट लंबाई चाहता है। तर्क है कि नीमच मंदसौर-रतलाम रेलखंड पर भविष्य में तीसरी और चौथी लाइन बिछाई जा सकती है इसलिए पर्याप्त स्पेस जरूरी है।
वाहन चालकों का ओवर ब्रिज के समीप से निकलना खतरनाक-
निर्माणाधीन ओवर ब्रिज के समीप से वाहन चालकों को निकलना काफी खतरनाक है। सुबह से लेकर रात तक वाहनों की भारी आवाजाही के बीच निर्माण कार्य का चलना दुर्घटना का सबब बन सकता है। वाहन चालकों को इस मार्ग से निकलते समय हर पल डर सताता है कि कहीं ओवर ब्रिज पर चल रहे निर्माण कार्य की सामग्री या अन्य उपकरण से कोई हादसा या दुर्घटना न हो जाए।
प्रोजक्ट की लेटलतिफी आमजन को पड़ रही भारी-
ब्रिज निर्माण के प्रोजक्ट के कार्य में आ रही रुकावट का खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। हिंगोरिया रेलवे फाटक से चीताखेड़ा आने जाने वाले वाहन चालको को के लिए परेशानी पैदा तो कर रहा है साथ ही नीमच से मंदसौर की जाने वाले वाहन चालक भी तरह तरह की मुुसबीतें झेलने को मजबूूर है। फाटक से नीमच की तरफ सडक़ बनाई वहां धूल के उड़ते गुबार से वाहन चालकों का आवागमन करना काफी दुश्वारियों भरा साबित हो रहा है। हिंगोरिया रेलवे फाटक पर बन रहा रेलवे ओवरब्रिज सरकारी सिस्टम में उलझकर रह गया है। लगभग 80 फीसदी निर्माण पूरा होने के बाद काम की रफ्तार धीमी पड़ गई है। कारण रेलवे और सेतु विकास निगम के बीच ब्रिज के फाटक वाले हिस्से की लंबाई को लेकर मतभेद है।
इनका कहना-
रेलवे की तरफ से हो रही लेटलतिफी : एसडीओ
हिंगोरिया रेलवे फाटक ओवरब्रिज को लेकर रेलवे की तरफ से देरी हो रही है। अब रेलवे विभाग के अधिकारी एक सप्ताह के अंदर लोकेशन सर्वे की बात कह रहे है।
-प्रवीण नरवले, एसडीओ, सेतु विकास निगम मंदसौर-नीमच
इनका कहना-
रेलवे विभाग द्वारा करीब 1 साल से हिंगोरिया रेलवे फाटक के पास बन रहे ओवर ब्रिज की ड्राईग डिजाइन नहीं देने के कारण काम रुका है। हमने 80 फीसदी कार्य पूर्ण कर लिया है लेकिन 20 फीसदी कार्य ड्राईग डिजाइन के कारण अटका है।पूर्व में इस संबंध में सेतू निगम ने रेलवे को पत्र भी लिखा था।
– एसके तोतला,तोतला इन्प्रसा.कं. प्रालि. नीमच
ड्राइंग डिजाइन शासन को भेजी जा चुकी है। रेलवे की तरफ से देरी नहीं हो रही।
मुकेश कुमार,जनसंपर्क अधिकारी,रेलवे मंडल रतलाम
