भोपाल। राजधानी में वक्फ बोर्ड की जमीन पर कब्रिस्तान की जगह कॉलोनी बनने का मामला सामने आया है। शहर के 125 कब्रिस्तानों में से 101 कब्रिस्तान गायब हो गए हैं, और अब केवल 24 कब्रिस्तान ही उपयोग में हैं। इसके साथ ही प्रदेश में वक़्फ़ की लगभग 90 फीसदी प्रॉपर्टी किसी न किसी प्रकार के विवाद में घिरी है. जिसमे अलग-अलग तरह से वक्फ की कई जमीनों पर कब्जे और अतिक्रमण हैं, तो कई संपत्तियों पर सरकारी दफ्तरों का संचालन हो रहा है।
भोपाल का पीएचक्यू, महिला थाना, पुलिस कण्ट्रोल रूम,होम गार्ड ऑफिस, यातयात थाना, यातायात पार्क, तकरीबन आधा जहांगीराबाद, शहीद नगर और शाजदा नगर समेत अन्य कई शासकीय इमारतों का वक़्फ़ की ज़मीन पर सञ्चालन हो रहा है।
साथ ही इन सभी संचालित हो रही प्रॉपर्टी के मामले कोर्ट में चल रहे हैं। और वक्फ बोर्ड को इन संपत्तियों से जितनी आय होना चाहिए, वो भी नहीं हो रही है।सरवर पटेल कहते हैं कि भोपाल में प्लेटफॉर्म नंबर-1 की तरफ सराय के रूप में वक्फ बोर्ड की बड़ी प्रॉपर्टी है। इस पर कुछ निजी लोगों का कब्जा है। इससे बोर्ड को कोई इनकम नहीं होती। भोपाल टॉकीज के पास बड़ा बाग कब्रिस्तान की जमीन पर बनी दुकानों से बोर्ड को एक रुपए भी किराया नहीं मिल रहा है जबकि इन दुकानों का किराया लाखों रुपए में है। इसके साथ ही पटेल कहते हैं कि मॉडल ग्राउंड स्टेशन रोड पर वक्फ बोर्ड की 15 दुकानें हैं, यहां से भी कोई किराया नहीं मिल रहा है, लोगों ने दादागिरी कर कब्जा कर रखा है। भोपाल के कांग्रेस नेता रियाज खान पर 7.11 करोड़ रुपए की रिकवरी निकाली गई, क्योंकि उन्होंने वक्फ में 15 दुकानें बताईं, जबकि जांच में 115 दुकानें पाई गईं।
यातयात थाने से पहले पुलिस कंट्रोल रूम बनाया गया था, जिसके साथ ही ज़मीन के सभी सही कागज़ कंट्रोल रूम में है, आगे वरिष्ठ अधिकारी और कोर्ट का जो भी फैसला होगा वह पुलिस द्वारा मान्य रहेगा
संजय सिंह, यातायात डीसीपी, भोपाल
