व्यवहार प्रबंधन: पूँजी निर्माण की लुप्त हो चुकी कड़ी

आशीष मलवीय, प्रमुख (डिस्ट्रिब्यूशन), वेल्थ मैनेजमेंट, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज

निवेश करते समय जोखिम उठाने की क्षमता, समय सीमाएँ, निवेश प्रबंधक की गुणवत्ता और परिसंपत्ति आवंटन जैसे कारकों का ध्यान रखा जाना चाहिए और इनके अनुरूप ही निवेश किया जाना चाहिए, यह हम सब समझते हैं। इन कारकों के अलावा धैर्य और व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों और भावनाओं के नियंत्रण की क्षमता भी उतने ही महत्वपूर्ण कारक हैं, जिन्हें अक्सर कम आँका जाता है।

सही निवेश सिद्धांतों का पालन करने के बावजूद, कई बार पोर्ट्फोलियो पर उचित परिणाम दिखाई नहीं देते जिसका कारण गलत निवेश न होकर हमारा व्यवहार होता है। इसे व्यावहारिक वित्त नामक विषय के माध्यम से बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।

परंतु इस व्यवहार के कारण निवेशक जो गलती करते हैं, वो यह है कि वे दूसरों को देखकर निर्णय लेते हैं, खासतौर पर तब, जब वह कई लोगों को संपत्ति विशेष से फायदा लेते हुए देखते हैं।

आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं: मान लीजिए 2011 में एक निवेशक ने एक रियल एस्टेट संपत्ति खरीदी। उसका यह निर्णय तर्कपूर्ण था:

• उसके द्वारा ऐसी संपत्ति में पहले किए गए निवेश से उसे छः वर्षों में 2.5 गुना प्रतिफल प्राप्त हुआ था।
• उसके कई दूसरे दोस्त ऐसी ही विभिन्न संपत्तियों के माध्यम से लाभ प्राप्त कर रहे थे।
• उनका बिल्डर बहुत सम्मानित था।
• जोखिम की प्रवृत्ति रियल एस्टेट के अनुरूप दीर्घकालिक थी।
• यह दीर्घकालिक निवेश था।

शुरुआत में, यह निर्णय सभी ओर से ठीक लग रहा था।
एक वर्ष में, संपत्ति पर प्रतिफल 30% बढ़ गया।
दो वर्षों में, यह 50% तक बढ़ गया।
निवेशक को अपना निर्णय सभी तरह से ठीक लग रहा था और उसे इस पर गर्व भी था।

हालाँकि, अगले सात वर्षों के दौरान कीमतें 50% के आसपास स्थिर रहीं। इस अवधि में, इक्विटी बाज़ार बहुत मज़बूत प्रदर्शन कर रहे थे जिससे तरलता और प्रतिफल अधिक प्रतीत हो रहे थे। इसी दौरान निवेशक को बिल्डर की ओर से देरी और कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा जिससे वह असहज हो गया। रियल एस्टेट के लिए बाज़ार में कुछ नकारात्मकता भी बढ़ी।

इन सबके कारण निवेशक ने 30% के फायदे पर अपनी उस संपत्ति को बेच दिया।

कुछ वर्षों बाद, उसी संपत्ति पर 15 वर्षों की अवधि में लगभग 12 गुना का लाभ हो गया।

तो, निवेशक ने शुरुआत में रियल एस्टेट पर दीर्घकाल में लाभ प्राप्त करने का जो निर्णय लिया था वह सही साबित हुआ, परंतु उसके व्यवहार के कारण परिणाम प्रभावित हो गया।

गलत क्या हुआ? – भेड़-चाल: निवेश का फैसला दूसरों को लाभ प्राप्त करते देखकर लिया गया था।

जब कोई व्यक्ति स्वविवेक के स्थान पर लोगों के फैसलों के अनुसार अपने फैसले लेता है तो ऐसी मानसिकता को ‘भेड़-चाल’ कहा जाता है। वित्तीय बाज़ारों में इसका मतलब होता है कि आसपास के लोगों के फैसलों को सही मानकर वे जो खरीद रहे हैं उसे ही खरीदना और जो वे बेच रहे हैँ उसे ही बेचना।

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। विकास के चरणों के दौरान, जीवित रहने के लिए समूह के साथ रहना आवश्यक था। लेकिन यदि निवेश की बात की जाए तो, निवेश के सिद्धांतों के अनुसार स्वविवेक से फैसले लेने के स्थान पर दूसरों का अनुसरण करना एक गलत दृष्टिकोण होता है।

निवेश में भेड़-चाल का पालन करना न सिर्फ निर्णय लेने का गलत दृष्टिकोण है बल्कि यह गलत स्थितियाँ बनाने के लिए भी जिम्मेदार होता है। जैसे कभी कभी किसी विकल्प की खरीद पर इतना भार दे दिया जाता है कि सभी उसे खरीदने लगते हैं और एक गिरावट आते ही पूरा बाज़ार गिर जाता है।

सीखें:
मूलभूत रूप से सही निर्णय लेकर किया गया निवेश बुरे परिणाम दे सकता है यदि:
• उसे भेड़-चाल के फलस्वरूप लिया गया हो,
• उसका मूल्यांकन अल्पकालिक सोच के अनुसार किया गया हो,
• मूल निर्णय के स्थान पर भावनात्मक प्रतिक्रिया के कारण संपत्ति को बेच दिया गया हो।

व्यवहार विज्ञान हमें सिखाता है कि पूँजी निर्माण अच्छे वित्त प्रबंधन के साथ साथ अच्छे आत्मप्रबंधन को से भी संबंध रखता है।

धैर्य रखने का मतलब सिर्फ इंतज़ार करने से नहीं है, बल्कि उतार चढ़ाव के बावजूद एक सोची समझी योजना पर बने रहने से है।

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