इंदौर:जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है शहर में जल संकट गहराता जा रहा है. कहीं एक दिन, कहीं दो दिन तो कहीं चार दिन में एक बार पानी दिया जा रहा है. गर्मी के कारण भूजल स्तर भी तेजी से कम हो रहा है, परिणामस्वरूप वार्डों में लगे सरकारी बोरिंग भी धीरे-धीरे दम तोड़ रहे हैं.शहर में अप्रैल की शुरुआत के साथ ही भीषण गर्मी ने जल संकट को विकराल बना दिया है. भूजल स्तर में भारी गिरावट और तालाबों का जलस्तर घटने के कारण प्रशासन ने शहर को जल अभावग्रस्त घोषित कर दिया है. भूजल को बचाने के लिए प्रशासन ने 30 जून 2026 तक निजी और गैर-सरकारी ट्यूबवेल (बोरिंग) की ड्रिलिंग पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. गर्मी और अधिक उपयोग के कारण वार्डों में लगे सरकारी बोरिंग सूख रहे हैं या उनसे पानी की आपूर्ति बहुत कम हो गई है. कई इलाकों में पानी की भारी किल्लत है, जिससे अब टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है.
गर्मी के दिनों में चितावाद क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 61 के त्रिवेणी नगर में हर वर्ष की तरह इस गर्मी में भी जल संकट गहराता जा रहा है. यहां हालात चिंताजनक बनते जा रहे हैं. क्षेत्र में नलों से मात्र 20-25 मिनट पानी सप्लाई की जाती हैं, उसमें भी आधे समय दूषित पानी आने की शिकायतें हैं. इससे लोगों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर देखने में आ रहा है. पानी कम समय आना और खराब गुणवत्ता के कारण रहवासी पर्याप्त पानी संग्रह नहीं कर पाते. त्रिवेणी नगर में यह समस्या पिछले कई वर्षों से बनी हुई है. हर गर्मी में स्थिति और बिगड़ जाती है. मजबूरी में लोगों को निजी टैंकर मंगवाकर पानी की व्यवस्था करना पड़ रही है. इसमें उन्हें अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है. इसको लेकर रहवासियों द्वारा कई बार निगम अधिकारियों को शिकायत की गईं और आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं निकला.
यह बोले रहवासी…
हमें 20-25 मिनट ही नलों से पानी मिलता है, उसमें भी आधे समय दूषित पानी आता रहता है. जो थोड़ा-बहुत पानी मिलता है, वह पर्याप्त नहीं होता.
– अर्चना पाल
गर्मी में बहुत कम पानी देते हैं, कभी दो दिन तो कभी चार दिन छोड़कर पानी देते हैं, जबकि नगर निगम द्वारा पानी का बिल पूरा वसूला जाता है.
– हेमलता बोरासी
नर्मदा पानी कम मिलता है और क्षेत्र के बोरिंग भी सूख रहे हैं. ऐसे में मजबूरन पैसा खर्च करके निजी टैंकर बुलवाना पड़ता है. नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को इस ओर ध्यान देकर समस्या का निदान करना चाहिए.
– जितेंद्र दुबे
