गोविंद बड़ोने
ब्यावरा: नगरपालिका अपने पांच साल पुराने अपूर्ण ऑडिटोरियम भवन को प्रस्तावित गीता भवन में समा देने की कार्ययोजना बना रही है. नपा ऐसा कर नगर को मिलने वाली दो उपलब्धियों को एक में बदलना चाहती है. नपा सूत्रों का कहना है कि ऐसा कर नया गीता भवन के बहाने निर्मित ऑडिटोरियम भवन को खण्डहर होने से बचाने का प्रयास कर रही है.
गौरतलब है कि नगरपालिका ने करीब पांच-छ वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा दिए जाने वाले विशेष अनुदान से ऑडिटोरियम भवन का निर्माण किया था. इस भवन के लिये शासन द्वारा 3 करोड़ रूपये स्वीकृत किये गये थे. नपा ने भवन के नाम पर तीन के बजाय चार करोड़ रूपये खर्च कर दिये, संबंधित एजेंसी की तीन करोड़ रूपये का भुगतान तो कर दिया लेकिन इसे पूर्ण करने में कम से कम एक-डेढ़ करोड़ रूपये की जरूरत नपा के समक्ष पड़ती रही. इस कारण यह कार्य आज तलक पूर्ण नहीं हो पाया.
परिणामस्वरूपनया ऑडिटोरियम भवन शुरू होने के पूर्व ही खण्डहर बनकर रह गया, नपा के पास न तो ऑडिटोरियम भवन को पूर्णकरने के लिये पैसे है और न ही दृढ़ इच्छा शक्ति. आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रही नपा कर्ज की नींव पर टिकी हुई है. नगरपालिका इन दिनों पैसे और जमीन की तंगी के बीच गुजर रही है. शासकीय राशि का समुचित उपयोग नहीं किये जाने और अपनी ही जमीन को सुरक्षित नहीं रखने के कारण नपा के सामने नित नये संकट पैदा हो रहे हैं. रही सही कसर राजनीतिक व्यवस्था ने चौपट कर नगर और नगरपालिका की बर्बादी के द्वार खोल रखे है,
ऑडिटोरियम को ‘गीता भवन’ में बदलने की योजना
हाल ही में सरकार ने प्रत्येक निकायों मैं गीता भवन बनाने की योजना बनाई है. इसके तहत नगर पालिका परिषद में इसके लिये करीब एक बीघा जमीन और 10 करोड रूपये स्वीकृत करने का प्रावधान किया गया है, नपा के पास पैसा नहीं है जो वह अपने पुराने ऑडिटोरियम को पूर्ण कर सके, न ही उसके पास जमीन है. उसकी खुद की जमीन अतिक्रमण से घिरी है. उसे अतिक्रमण मुक्त कराने की हिम्मत नहीं कर पा रही है. जमीन और पैसे की कमी का नपा ने एक हल खोजने का प्रयास किया है. नया अपने आधे-अधूरे ऑडिटोरियम को पूर्ण करने के लिये एक युक्ति खोजी है. इसके तहत नपा ऑडिटोरियम को ‘गीता भवन’ में बदलने की योजना बना रही है, इसमें नपा की है कि इस बहाने ऑडिटोरियम भी पूर्ण हो जायेगा और गौता भवन की कमी भी पूरी हो जायेगी, नपा का यह हल व्यवहारिक रूप में चाहे बेहतर ही लेकिन ब्यावरा नगर को मिलने वाली दो उपलब्धियों
एक में समा जाने से एक के लाभ से नगर हमेशा बंचित रह जायेगा. हालांकि व्यवहारिक रूप से इसे इसलिये ठीक माना जाना चाहिए कि नपा खण्डहर हो रहे ऑडिटोरियम को चालू करने में सफल हो सकेंगी, बहरहाल नपा ने प्रस्तावित गीता भवन को ऑडिटोरियम में समाने की कल्पना की है. इसके लिये शासन जो राशि देगा उससे ऑडिटोरियम भी बनकर तैयार हो जायेगा और वह गीता भवन के रूप में समाज के काम आयेगा, यदापि गीता भवन और ऑडिटोरियम भवन की ड्राइंग में कोई खास अंतर नहीं है. गीता भवन के लिये शासन नगरपालिका स्तर पर
10 करोड़ रूपये स्वीकृत करती है. इसकी बैठक क्षमता 500 लोगों की है इसके लिये लगभग 25 से 30 हजार पेट भूमि की आय
यह भूमि नपा के पास ऑडिटोरियम वाली भूमि के रूप में मौजूद है, ऑडिटोरियम को चालू करने के लिये इसे गीता भवन में समाहित करने का प्रयास कर रही है यह प्रवास बुरा नहीं है लेकिन अच्छा होता अगर नया ऑडिटोरियम और गीता भवन देने के लिये प्रयास करती तो नगर की एक के बाद एक मिलाकर सुविधा प्राप्त होती जिसका लाभलोगों को लंबे समय तक मिलता
6 गीता भवन के लिये नगर के समीप कोई शासकीय भूमि उपलब्ध नहीं है. प्रयास है कि ऑडिटोरियम को गीता भवन के रूप में विकसित किया जाये तो यह जल्द बनकर तैयार हो जायेगा और इसका शीघ्र उपयोग होने लगेगा. इस प्रकार की योजना प्रस्तावित है. इस विषय पर अभी प्रारंभिक विचार-विमर्श हुआ है. अगर परिषद और प्रशासन की सहमति होती है तो इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जावेगा
इकरार अहमद, सीएमओ, ब्यावरा
खण्डहर हो रहा पांच साल पहले बना ऑडिटोरियम
संसाधन यह खुद की जमीन की भी गया है नगर की दूर्भाग्य है कि नगर के रहवासी क्षेत्र में नप के पास कोई सरकारी जमीन नहीं है इसका दुश्चरिणाम यह है कि सामुदायिक भवन आदि कार्यों के लिये परेशान होते रहते है.
