नर्सिंग ऑफिसर की नियुक्ति में महिलाओं को शत प्रतिशत आरक्षण, जवाब तलब 

जबलपुर। नर्सिंग ऑफीसर भर्ती में महिलाओं को सौ फीसदी आरक्षण दिये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए सरकार से पूछा है कि जेंडर के आधार पर भेदभाव क्यों किया जा रहा है। याचिका पर अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी।

याचिकाकर्ता संतोष कुमार लोधी सहित कई अन्य पुरुष अभ्यर्थियों ने दायर याचिका में नर्सिंग ऑफिसर के भर्ती विज्ञापन को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया था कि कर्मचारी चयन मंडल द्वारा 2 अप्रैल 2026 को जारी विज्ञापन (नर्सिंग ऑफिसर एवं सिस्टर ट्यूटर भर्ती परीक्षा-2026) में नर्सिंग ऑफिसर के सौ प्रतिशत पद केवल महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित किये गये है। इससे योग्य पुरुष अभ्यर्थी आवेदन करने से पूरी तरह वंचित हो गए हैं। मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा (अराजपत्रित) सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2023 के तहत नर्सिंग ऑफिसर के पद के लिए कोई लिंग-आधारित प्रतिबंध नहीं है। मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के भर्ती विज्ञापन में किया गया यह प्रावधान वैधानिक नियमों के विपरीत है। तर्क दिया गया है कि पुरुष और महिला दोनों एक ही पाठ्यक्रम (बीएससी नर्सिंग/जीएमएम) पढ़ते हैं और उनके पास समान योग्यता व पंजीकरण होता है। । जेंडर के आधार पर सार्वजनिक रोजगार से पूर्णतः बाहर करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन है। याचिका में राहत चाही गयी थी कि विज्ञापन के उस हिस्से को निरस्त किया जाए जो 100 प्रतिशत पदों को महिलाओं के लिए आरक्षित करता है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता विशाल बघेल ने पैरवी की।

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