इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के चीन रवाना होने पर बवाल, जकार्ता में महिलाओं ने किया झाड़ू लेकर विरोध प्रदर्शन

जकार्ता, 03 सितंबर (वार्ता) इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में पुलिस के दुर्व्यवहार और सरकारी खर्चों की बर्बादी के विरोध मेंगुलाबी रंग के कपड़े पहने और झाड़ू लिए सैकड़ों महिलाओं ने बुधवार को संसद तक मार्च निकाला।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार प्रदर्शनकारी युवा मोटरसाइकिल टैक्सी चालक अफ़्फ़ान कुर्नियावान की पुलिस वाहन से कुचलकर मौत के बाद ये हिंसक हो गए।

रैली में शामिल इंडोनेशियाई महिला गठबंधन (आईडब्ल्यूए) की गुलाबी पोशाक पहने महिला प्रदर्शनकारियों ने कहा कि झाड़ू उनकी “राज्य, सैन्यवाद और पुलिस दमन की गंदगी को मिटाने” की इच्छा का प्रतीक है। प्रदर्शनकारियों ने “पुलिस सुधार” शब्दों वाले बैनर भी लहराए। प्रदर्शनकारियों में से एक, मुतियारा इका ने बीबीसी इंडोनेशिया को बताया, “विरोध प्रदर्शन अपराध नहीं हैं, बल्कि हर नागरिक में निहित लोकतांत्रिक अधिकार हैं।”

आईडब्ल्यूए एक राजनीतिक समूह है जिसमें 90 महिला संगठन और आंदोलन, साथ ही श्रमिक संघों, मानवाधिकार संगठनों और स्वदेशी समुदायों सहित विभिन्न नागरिक समाज समूह शामिल हैं।

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने जकार्ता में विरोध प्रदर्शनों के संचालन में मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों की “शीघ्र, गहन और पारदर्शी जाँच” का आह्वान किया है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडोनेशिया के कार्यकारी निदेशक उस्मान हामिद ने कहा, “राज्य को प्रदर्शनों के दौरान लोगों की सभी माँगों को तुरंत पूरा करना चाहिए, इससे पहले कि और ज़्यादा लोग हताहत हों।”

इंडोनेशियाई लीगल एड फ़ाउंडेशन के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त के अंत में हुए प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई – कुछ कथित तौर पर पुलिस हिंसा के कारण – जबकि कम से कम 1,042 लोगों को पूरे द्वीपसमूह के अस्पतालों में ले जाया गया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष अनीस हिदायत ने कहा कि मौजूदा स्थिति चिंताजनक है, खासकर अधिकारियों द्वारा की गई हिंसा के कारण जो पूरे प्रदर्शनों के दौरान जारी रही।

ऑल-इंडोनेशियाई छात्र संघ के पूर्व केंद्रीय समन्वयक हेरियांतो ने बीबीसी को बताया, “यह केवल एक मुद्दे का नहीं, बल्कि असमानता, शासन और जवाबदेही से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही चिंताओं का मामला है। प्रतीकात्मक बदलाव ज़रूरी हैं, लेकिन लोग और भी गहरे सुधारों की उम्मीद करते हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जो आम नागरिकों को प्रभावित करते हैं, जैसे कृषि नीति, शिक्षा और निष्पक्ष आर्थिक अवसर। अंतिम लक्ष्य एक ज़्यादा जवाबदेह, पारदर्शी और जन-केंद्रित शासन को बढ़ावा देना है।”

 

 

 

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