
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने बैतूल-भोपाल फोरलेन प्रोजेक्ट के तहत केसला-भौंरा-बरेठा के जंगल से हाईवे निर्माण पर असंतोष व्यक्त किया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने कहा कि सड़क के नीचे से टाइगर के लिए रास्ता बनाना पूरी तरह अनुचित है। टाइगर का स्वभाव है कि उसे सामने जंगल दिखेगा, तभी वह रास्ता पार करेगा। उसके जाने के लिए संकरा रास्ता बना रहे हैं, उससे कभी नहीं जायेगा। वह कभी भी रोड पर आ सकता है जिसके कारण टाइगर के साथ लोगों की जान को खतरा रहेगा। युगलपीठ ने एनएचएआई को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 24 अप्रैल को निर्धारित की है। अमरावती महाराष्ट्र निवासी अद्वैत क्योले की ओर से दायर याचिका में बैतूल-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग क्र 49 को फोरलेन में तब्दील करने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। दलील दी गई है कि सड़क बनाने से वन्य जीवों को सड़क के एक ओर से दूसरी ओर जाने में काफी परेशानी होगी और उनकी जान को हमेशा खतरा बना रहेगा। 1 अप्रैल 2022 को मप्र हाईकोर्ट ने सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व के बीच चल रहे निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी। बीते 23 मार्च 2026 को हाईकोर्ट ने इस निर्माण कार्य पर लगी रोक हटाने से इनकार कर दिया था। साथ ही नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी व नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ के अधिकारियों को तलब किया था।
याचिका की सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने कहा कि कोर्ट ने कहा कि जब 19.5 किमी के जंगल में से 10.5 किमी का हिस्सा ऊपर से ले जाने की सिफारिश पहले से की जा चुकी है, तो उसका पालन क्यों नहीं किया जा रहा है। सड़क किनारे यदि बैरिकेड्स लगा देंगे तो टाइगर सड़क पार कैसे करेंगे। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पक्ष रखा।
